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वायेजर 1 का इंटरस्टेलर स्पेस से फिर मिला संपर्क

सुदूर अंतरिक्ष से इंसान निर्मित यान हर बार चौंका रहा है

फ्लोरिडाः नासा के डीप स्पेस नेटवर्क ने पिछले 12 घंटों के भीतर एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसे अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है। पृथ्वी से लगभग 24 अरब किलोमीटर दूर स्थित वायेजर 1, जो मानव इतिहास में अब तक की सबसे दूर भेजी गई वस्तु है, ने तकनीकी खराबी के एक लंबे दौर के बाद फिर से सुसंगत और सार्थक डेटा भेजना शुरू कर दिया है।

देखें नासा का वीडियो

संकट और तकनीकी बाधा पिछले कई महीनों से वायेजर 1 का संचार तंत्र वैज्ञानिकों के लिए एक पहेली बन गया था। यह यान पृथ्वी पर सिग्नल तो भेज रहा था, लेकिन वे सिग्नल केवल बाइनरी कोड (0 और 1) के एक निरर्थक और अव्यवस्थित पैटर्न के रूप में थे। नासा के जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के इंजीनियरों ने गहन विश्लेषण के बाद पाया कि समस्या यान के फ्लाइट डेटा सबसिस्टम में थी। इसका काम यान के वैज्ञानिक उपकरणों से डेटा एकत्र करना और उसे पृथ्वी पर भेजने के लिए पैकेज करना है। जांच में पता चला कि इस सिस्टम की एक मेमोरी चिप खराब हो गई थी, जिसकी वजह से पूरा डेटा दूषित हो रहा था।

45 घंटे का धैर्य और इंजीनियरिंग का कौशल वायेजर 1 इतनी दूरी पर है कि वहां तक रेडियो तरंगों को पहुंचने में 22.5 घंटे लगते हैं और वहां से उत्तर वापस आने में भी उतना ही समय लगता है। यानी, एक कमांड भेजने और उसका परिणाम जानने के लिए वैज्ञानिकों को लगभग 45 घंटे तक सांसें थामकर इंतजार करना पड़ता था।

इंजीनियरों ने सीधे तौर पर चिप को बदलने के बजाय, उस खराब हिस्से को छोड़कर बाकी की मेमोरी में कोड को पुनर्व्यवस्थित करने का एक जटिल सॉफ्टवेयर पैच तैयार किया। पिछले 12 घंटों में प्राप्त नवीनतम टेलीमेट्री डेटा से यह पुष्टि हुई है कि यह कोड पैच सफलतापूर्वक इंस्टॉल हो गया है और यान ने फिर से हेल्थ रिपोर्ट और वैज्ञानिक डेटा भेजना शुरू कर दिया है।

इंटरस्टेलर स्पेस की नई जानकारियां अब यह यान अपने उपकरणों के जरिए इंटरस्टेलर स्पेस (सितारों के बीच का वह स्थान जहां सूर्य का प्रभाव खत्म हो जाता है) की प्लाज्मा लहरों, चुंबकीय क्षेत्रों और ब्रह्मांडीय किरणों की अमूल्य जानकारी साझा कर रहा है। 1977 में लॉन्च किया गया यह यान अपनी निर्धारित आयु से दशकों अधिक समय तक जीवित रहकर इंजीनियरिंग की श्रेष्ठता का प्रमाण दे रहा है।

वैज्ञानिकों को अब अटूट विश्वास है कि वायेजर 1 कम से कम 2030 तक सक्रिय रहेगा और हमें उस अंधेरे और अज्ञात ब्रह्मांड के बारे में बताता रहेगा, जहां आज तक कोई और मानवीय वस्तु नहीं पहुंच सकी है। यह सफलता केवल एक मशीन की मरम्मत नहीं, बल्कि मानव अन्वेषण की अदम्य भावना की जीत है।