युद्ध की मजबूरी ने बदल दिया जाल का उपयोग भी
कीवः यूक्रेन में रूसी ड्रोनों के कहर से बचने के लिए एक अनोखा और स्वदेशी तरीका अपनाया जा रहा है। नीदरलैंड में कभी फूलों की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाले जाल और समुद्र में फेंके गए मछली पकड़ने वाले जालों को अब यूक्रेन में सैनिकों और नागरिकों की जान बचाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
पूरे यूरोप में किसान और मछुआरे इस तरह के जालों को इकट्ठा कर रहे हैं ताकि हजारों मील दूर युद्ध क्षेत्र में सुरक्षा कवच बनाया जा सके। रूस के ड्रोन न केवल यूक्रेनी सेना के रसद मार्गों को निशाना बनाते हैं, बल्कि अस्पतालों और नागरिक यातायात पर भी हमले करते हैं। दक्षिण यूक्रेन का खेरसॉन शहर इन हमलों का मुख्य केंद्र बना हुआ है। खेरसॉन सैन्य प्रशासन के उप प्रमुख ओलेक्सांद्र टोलोकोनिकोव के अनुसार, रूसी सेना हर हफ्ते समुदायों पर लगभग 2,500 ड्रोन लॉन्च करती है। अकेले खेरसॉन क्षेत्र में इस साल इन हमलों से 120 लोगों की मौत हो चुकी है।
यूक्रेन ने अब अपने शहरों और रणनीतिक सड़कों पर इन जालों का एक जाल बिछा दिया है। इसकी प्रभावशीलता इस प्रकार देखी जा सकती है। अस्पतालों के आंगन, बिजली जेनरेटर और खरीदारी की सड़कों के ऊपर जाल ताने गए हैं। रोड्स ऑफ लाइफ कही जाने वाली मुख्य सड़कों पर खंभों के सहारे दर्जनों किलोमीटर लंबी नेटिंग की गई है ताकि चलते हुए वाहनों पर ड्रोन न गिर सकें। जालों और अन्य तकनीकी उपायों के मेल से यूक्रेनी सेना अब 80-95% रूसी ड्रोनों को नष्ट करने या रोकने में सक्षम है।
इन जालों को पूरे यूरोप से स्वयंसेवी समूहों द्वारा ट्रकों में भरकर यूक्रेन भेजा जा रहा है। नीदरलैंड के क्लास पॉट द्वारा संचालित लाइफ गार्जियंस सबसे बड़ा समूह है, जिसने अब तक 8,000 टन से अधिक जाल भेजे हैं। शुरुआत में इनका उपयोग छलावरण के लिए किया गया था, लेकिन अब ये ड्रोन-विरोधी रक्षा प्रणाली का अनिवार्य हिस्सा बन गए हैं।