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एनयूजे के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में संगठन पर चर्चा

फर्जी संगठनों पर कानूनी कार्रवाई का प्रस्ताव

  • शीघ्र नया चुनाव कराने पर सहमति

  • राज्यों से भी मुकदमे दर्ज किये जाएंगे

  •  वर्तमान कमेटी को चार माह का विस्तार

राष्ट्रीय खबर

रांचीः नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में संगठन के विस्तार और संविधान संशोधन संबंधी मुद्दों पर चर्चा के साथ साथ फर्जी संगठनों पर कार्रवाई पर भी विचार विमर्श हुआ। रांची प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम में चर्चाओं का दौर तीन चरणों में हुआ। झारखंड के महासचिव राजीव नयनम ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बैठक के आयोजन की जिम्मेदारी सौंपने पर आभार जताया।

एनयूजे के महासचिव प्रदीप तिवारी ने विषय प्रवेश करते हुए दिल्ली कार्यालय के संचालन, चुनाव और संगठन के विस्तार पर जानकारी दी। राष्ट्रीय अध्यक्ष रासबिहारी ने संगठन के समक्ष मौजूदा चुनौतियों की जानकारी दी और खास तौर पर फर्जी संगठनों के खिलाफ अदालतों में चल रहे मुकदमों की जानकारी दी।

उन्होंने कहा ऐसे लोग जो अदालत के आदेश के बाद भी एनयूजे के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं, उनके खिलाफ अब अलग अलग राज्यों में भी मामला दर्ज  किया जाएगा। इसके अलावा सभी ऐसे राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी पत्र लिखकर वास्तविकता की जानकारी दी जाएगी। उन्होंने संगठन की वर्तमान आर्थिक स्थिति का विवरण भी पेश किया।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि यूनियन का चुनाव लंबित है, जिसे शीघ्र पूरा करना होगा। उन्होंन  प्रस्तावित संविधान संशोधन पर भी जानकारी देते हुए कहा कि इस संशोधन की आवश्यकता क्यों पड़ी है। रासबिहारी ने कहा कि वर्तमान में फर्जी समाचारों की बाढ़ से भी पत्रकारिता प्रभावित हो रही है। दूसरी तरफ सरकार और समाचार मालिक भी अब किसी किस्म की ट्रेड यूनियन गतिविधियों का खुलकर विरोध करते हैं। ऐसे में यूनियन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।

उड़ीसा के प्रदेश अध्यक्ष प्रसन्न  मोहंती ने कहा कि संगठन में चुनौतियां बहुत अधिक है और नये पदाधिकारियों को आगे आकर इस जिम्मेदारी का पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि चूंकि चुनाव की प्रक्रिया की घोषणा हो  चुकी है। इसलिए वर्तमान में संविधान संशोधन करना सही नहीं होगा।

नई कमेटी के आने के बाद नियमानुसार इसकी प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। बैठक में नये अध्यक्ष के  नाम पर भी अनौपचारिक चर्चा हुई और जो लोग इस बैठक में मौजूद नहीं थे, उनसे भी इस मुद्दे पर सहमति लेने की बात आयी। चुनाव अधिकारी अशोक किंकर ने दूरभाष पर बताया कि चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें एक मददगार की जरूरत है क्योंकि वह बीमारी की वजह से दिल्ली से बाहर रह रहे हैं। त्रिपुरा के प्रशांत चकवर्ती ने दूसरों मुद्दों के साथ साथ पत्रकारों के लिए रेलवे रियायत पर फिर से सरकार से मांग करने की बात कही।

इस बैठक में दिल्ली के अलावा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और असम के प्रतिनिधियों ने भी अपने अपने विचार व्यक्त किये। यह तय किया गया कि चुनाव लंबित होने की स्थिति में वर्तमान कमेटी के कार्यकाल  को चार महीने के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव राष्ट्रीय कार्यकारिणी की औपचारिक बैठक में पारित किया जाए। इस अवधि के बीच ही नये पदाधिकारियों के चुनाव संपन्न करा लिये जाए।

इसी आयोजन स्थल पर एक फरवरी को झारखंड का प्रदेश स्तरीय सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा। जिसमें भाग लेन  के लिए विभिन्न जिलों से प्रतिनिधि रांची पहुंचने लगे हैं।