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प्रकाश की सहायता से किया सूचना का टेलीपोर्टेशन

क्वांटम क्रिप्टोग्राफी की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयोग सफल

  • पहला प्रयोग सिर्फ दस फीट तक रहा

  • फोटोन के सहारे ही ऐसा किया गया

  • डेटा सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम

राष्ट्रीय खबर

रांचीः आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। अपराधी बैंक खातों में सेंध लगाने से लेकर पहचान चोरी तक कर रहे हैं, और एआई इन हमलों को और अधिक सटीक बना रहा है। ऐसे में क्वांटम क्रिप्टोग्राफी सुरक्षा की एक नई उम्मीद बनकर उभरी है। स्टटगार्ट विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ सेमीकंडक्टर ऑप्टिक्स एंड फंक्शनल इंटरफेस के शोधकर्ताओं ने हाल ही में क्वांटम रिपीटर के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है।

आईएचएफजी के प्रमुख प्रोफेसर पीटर मिचलर के अनुसार, दुनिया में पहली बार दो अलग-अलग क्वांटम डॉट्स से उत्पन्न फोटोन के बीच क्वांटम जानकारी को सफलतापूर्वक स्थानांतरित किया गया है। सामान्य संचार में डेटा 0 और 1 के रूप में चलता है। क्वांटम संचार में भी यही सिद्धांत है, लेकिन यहाँ सूचना के वाहक एकल फोटोन होते हैं। इन फोटोन की ध्रुवीकरण दिशा के माध्यम से डेटा कोड किया जाता है। क्वांटम मैकेनिक्स के नियमों के कारण, यदि कोई इस संचार को बीच में रोकने या मापने की कोशिश करता है, तो उसके निशान छूट जाते हैं, जिससे हैकिंग का तुरंत पता चल जाता है।

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क्वांटम रिपीटर की आवश्यकता वर्तमान इंटरनेट बुनियादी ढांचे में ऑप्टिकल फाइबर का उपयोग होता है, जहाँ सिग्नल लगभग 50 किलोमीटर के बाद कमजोर हो जाते हैं। सामान्य सिग्नल को एम्पलीफायर से बढ़ाया जा सकता है, लेकिन क्वांटम जानकारी को न तो कॉपी किया जा सकता है और न ही एम्पलीफाई। यहीं क्वांटम टेलीपोर्टेशन काम आता है। इसके माध्यम से जानकारी को एक फोटोन से दूसरे में स्थानांतरित किया जाता है, भले ही सूचना अज्ञात हो।

इस प्रयोग के लिए वैज्ञानिकों ने ऐसी सेमीकंडक्टर लाइट सोर्स विकसित कीं, जो लगभग एक जैसे फोटोन उत्सर्जित करती हैं। प्रयोग के दौरान, एक क्वांटम डॉट ने एक एकल फोटोन उत्सर्जित किया और दूसरे ने एक उलझा हुआ फोटोन जोड़ा बनाया। जब ये फोटोन आपस में मिलते हैं, तो उनकी सुपरपोजिशन मूल फोटोन की जानकारी को दूर स्थित दूसरे फोटोन तक स्थानांतरित कर देती है। इस प्रक्रिया में क्वांटम फ्रीक्वेंसी कन्वर्टर्स का भी उपयोग किया गया, ताकि फोटोन के बीच आवृत्ति के अंतर को ठीक किया जा सके।

वर्तमान में यह प्रयोग 10 मीटर की दूरी पर सफल रहा है और इसकी सटीकता 70 फीसद से थोड़ी अधिक है। हालांकि, पिछले शोधों ने दिखाया है कि यह जुड़ाव 36 किलोमीटर तक सुरक्षित रह सकता है। शोध टीम अब सेमीकंडक्टर निर्माण तकनीकों को बेहतर बना रही है ताकि इस सफलता दर को और बढ़ाया जा सके। यह खोज भविष्य के सुरक्षित क्वांटम इंटरनेट की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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