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हाईकोर्ट के चौखट तक जा पहुंचा मौनी अमावस्या स्नान विवाद

शंकराचार्य और प्रशासन के बीच आर-पार

  • दोनों पक्षों का परस्पर विरोधी दावा जारी

  • मारपीट के खिलाफ प्राथमिकी की मांग

  • शंकराचार्य ने कहा अफसर माफी मांगे

राष्ट्रीय खबर

लखनऊः प्रयागराज में आयोजित हो रहे माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के सम्मानजनक स्नान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक नई रार में बदल गया है। जहाँ एक ओर शंकराचार्य खेमा प्रशासन द्वारा सुलह की कोशिशों का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों के सख्त रुख ने इस विवाद में नया ट्विस्ट ला दिया है। मौनी अमावस्या पर हुई कथित अभद्रता और मारपीट का यह मामला अब कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के जनसंपर्क अधिकारी ने हाल ही में दावा किया कि माघ मेले के बड़े प्रशासनिक अधिकारी स्वामी जी को मनाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वे माघ पूर्णिमा पर दोबारा स्नान के लिए प्रयागराज आएं। हालांकि, प्रयागराज प्रशासन ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।

अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि उनकी ओर से शंकराचार्य से दोबारा संपर्क करने की कोई पहल नहीं की गई है। मौनी अमावस्या के विवाद के बाद वाराणसी लौट चुके स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ पूर्णिमा के स्नान के लिए दो प्रमुख शर्तें रखी हैं। मौनी अमावस्या के दिन हुई अभद्रता और बटुकों के साथ मारपीट के लिए जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी लिखित में माफी मांगें। चारों पीठों के शंकराचार्यों के लिए कुंभ और माघ मेले में स्नान का एक स्थाई मानक संचालन प्रक्रिया निर्धारित किया जाए, ताकि भविष्य में संतों का अपमान न हो।

शंकराचार्य पक्ष का कहना है कि यदि प्रशासन इन शर्तों को स्वीकार कर वाराणसी आकर उन्हें आमंत्रित करता है, तभी वे ससम्मान वापस आएंगे। हाईकोर्ट में याचिका और सीबीआई जांच की मांग 18 जनवरी को बटुकों (शिष्यों) के साथ हुई कथित मारपीट का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट की दहलीज पर है।

कोर्ट में एक लेटर पिटीशन दाखिल की गई है, जिसमें दोषी पुलिसकर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज करने, संबंधित अधिकारियों को निलंबित करने और पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की मांग की गई है। इस कानूनी हस्तक्षेप ने मेले के प्रशासनिक प्रबंधन पर दबाव बढ़ा दिया है। वर्तमान में स्थिति यह है कि जहाँ संत समाज अपमान के घूंट पीकर न्याय की मांग कर रहा है, वहीं प्रशासन अपने रुख पर अडिग है, जिससे माघ पूर्णिमा के आगामी स्नान पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।