भारत और ईयू के ट्रेड डील का असर दिखने लगा
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भारत के साथ किए गए व्यापारिक समझौतों को लेकर यूरोपीय देशों की हालिया रणनीति पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। बुधवार को एक साक्षात्कार के दौरान, बेसेंट ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भू-राजनीतिक सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर अमेरिका की चिंताओं को स्पष्ट रूप से सामने रखा।
जब बेसेंट से पूछा गया कि क्या भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ता व्यापारिक जुड़ाव अमेरिकी आर्थिक हितों के लिए खतरा पैदा करता है, तो उनका रुख मिला-जुला रहा। उन्होंने यह स्वीकार किया कि संप्रभु देशों को अपने हित में निर्णय लेने का अधिकार है, लेकिन उन्होंने यूरोपीय देशों के दोहरे मापदंड पर अपनी गहरी निराशा व्यक्त की।
बेसेंट ने विशेष रूप से यूक्रेन में जारी युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि यूरोप की वर्तमान कार्रवाई बेहद निराशाजनक है। अमेरिका का मानना है कि जब वाशिंगटन यूरोपीय सुरक्षा के लिए भारी निवेश कर रहा है, तब यूरोप द्वारा अन्य बड़े बाजारों के साथ स्वतंत्र रूप से व्यापारिक लाभ खोजना एक तरह की रणनीतिक विसंगति है।
हालांकि उन्होंने यह नहीं कहा कि अमेरिका भारत के साथ व्यापार का विरोधी है, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि यूरोप को वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और अपने सहयोगियों के साथ समान साझा हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने टिप्पणी की कि देशों को वही करना चाहिए जो उनके लिए सबसे अच्छा हो, लेकिन यह वैश्विक गठबंधन की कीमत पर नहीं होना चाहिए।
स्कॉट बेसेंट का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और यूरोपीय संघ एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। अमेरिका को चिंता है कि यदि यूरोप और भारत के बीच व्यापारिक शर्तें अमेरिका के मुकाबले अधिक अनुकूल होती हैं, तो इससे अमेरिकी निर्यातकों को नुकसान हो सकता है।
साथ ही, यूक्रेन संकट के बीच यूरोप की आर्थिक निर्भरता का किसी भी तरह का विस्थापन अमेरिका की साझा रणनीति को कमजोर कर सकता है। कुल मिलाकर, बेसेंट की टिप्पणियां इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में ट्रांस-अटलांटिक (अमेरिका-यूरोप) संबंधों में व्यापारिक प्रतिस्पर्धा और सुरक्षा प्रतिबद्धताओं को लेकर तनाव बढ़ सकता है।