Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Jharkhand Weather Update: झारखंड में बदला मौसम का मिजाज; मंगलवार को तेज हवा, वज्रपात और बारिश का 'ये... हजारीबाग रामनवमी में मातम! विसर्जन जुलूस के दौरान 3 लोगों की जान गई, लगभग 1000 श्रद्धालु चोटिल पतरातू में अपराधियों का तांडव, ताबड़तोड़ फायरिंग में सुरक्षा गार्ड को लगी गोली Khunti Murhu Violence News: मुरहू हिंसा के बाद खूंटी में तनाव; अनिश्चितकालीन बंद का ऐलान, भारी पुलिस... KITG 2026 Hockey Semifinals: खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स: छत्तीसगढ़ की पुरुष और महिला टीम सेमीफाइनल मे... Khelo India Tribal Games 2026: बालिका फुटबॉल में असम और तमिलनाडु की बड़ी जीत; छत्तीसगढ़ समेत चार टीम... जशपुर में बड़ा हादसा: पुल से नीचे गिरी तेज रफ्तार बाइक, 2 युवकों की मौके पर मौत इंदिरा मार्केट में भीषण आग का तांडव, दो दुकानें जलकर खाक; लाखों का सामान खाक दुर्ग में 'बचपन का टिकट' कार्यक्रम की धूम; हजारों महिलाओं ने फिर से जिया अपना बचपन Kawardha SLRM Center Fire: कवर्धा के SLRM सेंटर में लगी भीषण आग; 12 घंटे बाद भी धधक रहा कचरा, बुझाने...

किसान परिवार ने अपना घर तीन सौ फीट खिसकाया

मोगा के विशेषज्ञ ठेकेदार की मदद से हो रहा काम

राष्ट्रीय खबर

चंडीगढ़ः पंजाब के संधू कलां गांव में इंजीनियरिंग और जिजीविषा का एक अद्भुत उदाहरण देखने को मिल रहा है। यहाँ एक किसान परिवार ने अपने दो मंजिला मकान को ढहाए जाने से बचाने के लिए उसे हाइड्रोलिक जैक की मदद से मूल स्थान से 300 फीट दूर स्थानांतरित करने का बीड़ा उठाया है। यह मकान भारतमला हाईवे परियोजना के प्रस्तावित मार्ग के बीच में आ रहा था।

साल 2017 में निर्मित यह घर तैतीस गुणा चौवालीस फीट के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। इसमें पाँच कमरे, दो लॉबी, एक रसोईघर और दो बाथरूम के साथ-साथ पशुओं के लिए बने शेड भी शामिल हैं। मकान को ढहाने के बजाय उसे सुरक्षित बचाने के लिए परिवार ने मोगा जिले के एक विशेषज्ञ ठेकेदार को काम सौंपा है।

अभी इस मकान को प्रतिदिन लगभग 8 से 10 फीट की रफ्तार से खिसकाया जा रहा है। पूरी संरचना को जमीन से उठाकर लोहे के रोलर्स और हाइड्रोलिक जैक पर टिकाया गया है। केवल स्थानांतरण कार्य के लिए ठेकेदार के साथ 10.36 लाख रुपये का सौदा हुआ है, हालांकि कुल खर्च इससे काफी अधिक होने की उम्मीद है।

घर के मालिक सुखप्रीत सिंह के अनुसार, उनकी 5 कनाल और 12 मरला कृषि भूमि पहले ही सड़क परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा चुकी थी। विवाद तब शुरू हुआ जब प्रशासन ने घर को भी गिराने का प्रयास किया। विरोध स्वरूप परिवार के कुछ सदस्य उच्च वोल्टेज वाले बिजली के टावर पर चढ़ गए थे। इस कड़े विरोध के बाद, स्थानीय प्रशासन ने परिवार को मुआवजे का आश्वासन दिया और घर को दूसरी जगह स्थानांतरित करने के लिए पर्याप्त समय भी प्रदान किया। सुखप्रीत सिंह का कहना है कि उन्होंने जमीन तो हाईवे के लिए दे दी, लेकिन अपनी यादों और मेहनत से बने घर को वह खोना नहीं चाहते थे।

मकान को खिसकाने का काम पिछले महीने शुरू हुआ था। अब तक लगभग 100 फीट का सफर तय किया जा चुका है। ठेकेदार का अनुमान है कि घर को उसके अंतिम गंतव्य तक पहुँचाने में अभी दो महीने का समय और लगेगा। यह घटना न केवल तकनीकी कौशल को दर्शाती है, बल्कि अपनी संपत्ति के प्रति एक किसान के भावनात्मक लगाव को भी उजागर करती है।