इलाके में फिर से सैन्य अभियान की आशंका
बारा: अफगानिस्तान की सीमा से सटे पाकिस्तान के सुदूर उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र से एक बड़ी मानवीय त्रासदी की खबर आ रही है। स्थानीय निवासियों और अधिकारियों के अनुसार, प्रतिबंधित पाकिस्तानी तालिबान के खिलाफ संभावित सैन्य अभियान के डर और अनिश्चितता के कारण अब तक 70,000 से अधिक लोग अपना घर छोड़ चुके हैं। पलायन करने वालों में अधिकांश महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।
खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के तिराह कस्बे से हो रहे इस पलायन को लेकर पाकिस्तान सरकार और स्थानीय जनता के बयानों में भारी अंतर है। जहाँ एक ओर हजारों लोग डर के साये में भाग रहे हैं, वहीं पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने किसी भी सैन्य अभियान की योजना से इनकार किया है।
इस्लामाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने दावा किया कि लोग सैन्य कार्रवाई के डर से नहीं, बल्कि खराब मौसम और भारी बर्फबारी के कारण पलायन कर रहे हैं। हालांकि, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। पलायन तब शुरू हुआ जब करीब एक महीने पहले स्थानीय मस्जिदों के लाउडस्पीकरों से निवासियों को 23 जनवरी तक तिराह छोड़ने की चेतावनी दी गई थी, ताकि वे संभावित युद्ध की चपेट में आने से बच सकें।
स्थानीय सरकारी प्रशासक तल्हा रफीक आलम के अनुसार, अब तक लगभग 10,000 परिवारों का पंजीकरण किया गया है। तिराह की कुल आबादी करीब 1,50,000 है, जिसका लगभग आधा हिस्सा अब विस्थापित हो चुका है। प्रशासन ने पंजीकरण की समयसीमा को बढ़ाकर 5 फरवरी कर दिया है। बारा और नजदीकी कस्बों में पहुँच रहे शरणार्थियों की आपत्तियां दिल दहला देने वाली हैं।
35 वर्षीय जर बादशाह ने बताया कि उनके गांव में मोर्टार फटने से एक महिला की मौत हो गई और चार बच्चे घायल हो गए, जिसके बाद बुजुर्गों ने गांव खाली करने का आदेश दिया। सिख समुदाय के 27 वर्षीय नरेंद्र सिंह ने बताया कि सुरक्षा के खतरों के साथ-साथ भोजन की भारी किल्लत ने उन्हें घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया। पंजीकरण केंद्रों पर लोगों की लंबी कतारें लगी हैं और वे सरकारी सहायता मिलने में हो रही देरी की शिकायत कर रहे हैं।
इस मुद्दे पर पाकिस्तान की संघीय सरकार और खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय सरकार के बीच ठन गई है। मुख्यमंत्री सुहैल अफरीदी (जिनकी पार्टी पूर्व पीएम इमरान खान से जुड़ी है) ने सेना की आलोचना करते हुए कहा है कि उनकी सरकार तिराह में पूर्ण पैमाने पर सैन्य अभियान की अनुमति नहीं देगी। उन्होंने संघीय सरकार पर विस्थापितों की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया है।
पाकिस्तानी सेना का कहना है कि वे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के खिलाफ खुफिया आधारित अभियान जारी रखेंगे। सैन्य अधिकारियों का आरोप है कि 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता वापसी के बाद टीटीपी का मनोबल बढ़ा है और वे आम नागरिकों को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। फिलहाल, हजारों बेघर लोग कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे या सरकारी स्कूलों में बने अस्थायी केंद्रों में भविष्य की अनिश्चितता के साथ रातें गुजार रहे हैं।