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विमान ईंधन के लिए घोस्ट शिप का उपयोग

म्यांमार में जारी गृहयुद्ध के बीच ही नई जानकारी मिली

बैंकॉकः मानवाधिकार समूह एमनेस्टी इंटरनेशनल ने सोमवार को कहा कि सैन्य शासन वाले म्यांमार ने रूस, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वाले देशों की रणनीति अपना ली है। म्यांमार अपने गृहयुद्ध में हवाई हमलों के लिए इस्तेमाल होने वाले विमानन ईंधन के स्रोतों को छिपाने के लिए संदिग्ध जहाजों और घुमावदार समुद्री रास्तों का सहारा ले रहा है।

लंदन स्थित इस समूह की जांच के अनुसार, व्यापार, शिपिंग, सैटेलाइट और पोर्ट अथॉरिटी के आंकड़ों का विश्लेषण संकेत देता है कि म्यांमार की सेना छद्म जहाजों के माध्यम से जेट ईंधन का आयात कर रही है। ये जहाज पकड़े जाने से बचने के लिए अपने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम यानी लोकेशन-ट्रैकिंग रेडियो को बंद कर देते हैं।

एमनेस्टी की रिपोर्ट के अनुसार, म्यांमार ने 2025 में 109,000 टन से अधिक विमानन ईंधन का आयात किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 69% अधिक है। 2021 में आंग सान सू ची की निर्वाचित सरकार को सेना द्वारा अपदस्थ किए जाने के बाद से यह अब तक की सबसे बड़ी मात्रा है।

एमनेस्टी की क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक मोंटसे फेरर ने कहा, तख्तापलट के पांच साल बाद भी म्यांमार जुंटा (सैन्य शासन) प्रतिबंधों से बचने और जेट ईंधन आयात करने के नए तरीके खोज रहा है। 2025 सैन्य कब्जे के बाद से हवाई हमलों के लिए रिकॉर्ड पर सबसे घातक वर्ष रहा है।

सैन्य सरकार के विरोधियों का मानना है कि विमानन ईंधन की आपूर्ति को रोकना उनकी युद्ध क्षमता को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है, जिसके कारण बड़ी संख्या में नागरिक हताहत हुए हैं। असिस्टेंस एसोसिएशन फॉर पॉलिटिकल प्रिजनर्स के अनुसार, 2021 से अब तक सुरक्षा बलों द्वारा 7,700 से अधिक नागरिक मारे जा चुके हैं।

एमनेस्टी के अनुसार, अमेरिका और ब्रिटेन के नेतृत्व में लगाए गए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हवाई हमलों को रोकने में प्रभावी नहीं रहे हैं। इन सैन्य कार्रवाइयों को मुख्य रूप से रूस और चीन जैसे सहयोगियों से हथियारों का समर्थन भी मिल रहा है।

जांच में पुष्टि हुई है कि 2024 के मध्य से 2025 के अंत के बीच चार जहाजों द्वारा म्यांमार को विमानन ईंधन की कम से कम नौ अलग-अलग खेप भेजी गईं। इस दौरान ईंधन लाने के तरीकों में बड़े बदलाव देखे गए, जैसे कि खुले समुद्र में जहाजों के बीच ईंधन का स्थानांतरण करना और जहाजों के नाम, झंडे या स्वामित्व को बार-बार बदलना। इस तरह की रणनीति का उपयोग रूस, ईरान और वेनेजुएला जैसे देश प्रतिबंधों से बचने के लिए करते रहे हैं।