अदालत ने केजरीवाल को बडी राहत प्रदान की
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय के समन की कथित अवहेलना से जुड़े दो आपराधिक मामलों में केजरीवाल को बरी कर दिया है। यह मामला अब रद्द हो चुकी दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा था।
राउज एवेन्यू कोर्ट के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट पारस दलाल ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि प्रवर्तन निदेशालय यह साबित करने में विफल रहा कि केजरीवाल ने जानबूझकर समन की अवहेलना की थी। अदालत ने माना कि दंड प्रक्रिया संहिता या मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम के तहत केवल ईमेल के जरिए समन भेजना कानूनी रूप से वैध या पर्याप्त तामील नहीं माना जा सकता।
जज ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आवाजाही का अधिकार (अनुच्छेद 19) हर नागरिक के लिए सर्वोपरि है। एक मुख्यमंत्री के रूप में केजरीवाल के पास भी ये अधिकार थे और जांच एजेंसी को समन की तामील के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का सख्ती से पालन करना चाहिए था। कोर्ट ने पाया कि ईडी ने धारा 65बी (साक्ष्य अधिनियम) के तहत आवश्यक हलफनामा पेश नहीं किया, जिससे समन की उचित तामील साबित नहीं हो सकी।
ईडी ने फरवरी 2024 में केजरीवाल के खिलाफ दो शिकायतें दर्ज की थीं, जिसमें आरोप लगाया गया था कि वे नवंबर 2023 से जनवरी 2024 के बीच जारी किए गए पांच समन पर जानबूझकर पेश नहीं हुए। केजरीवाल ने इन समन को अवैध और राजनीति से प्रेरित बताया था। हालांकि, यह बरी होना केवल समन की अवहेलना वाले मामलों तक सीमित है; मुख्य आबकारी नीति मामले की जांच और सुनवाई अभी भी जारी रहेगी।
फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर सत्यमेव जयते लिखकर अपनी खुशी जाहिर की। वहीं, आम आदमी पार्टी के नेताओं ने इसे मोदी सरकार द्वारा केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग पर एक करारा तमाचा बताया। दूसरी ओर, भाजपा ने स्पष्ट किया कि यह केवल समन वाले तकनीकी मामले में राहत है, मुख्य भ्रष्टाचार के मामले में नहीं।