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आई पैक और ममता बनर्जी पर लगाया साक्ष्य मिटाने का आरोप

कोयला तस्करी मामले पर ईडी की नई पहल

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय ने राजनीतिक परामर्शदाता कंपनी आई-पैक (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के खिलाफ अपनी जांच तेज कर दी है। बुधवार को कोलकाता में ईडी ED के निदेशक राहुल नवीन की मौजूदगी में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक हुई।

संकेतों के अनुसार, आई-पैक के प्रमुख प्रतीक जैन को जल्द ही पूछताछ के लिए समन भेजा जा सकता है, क्योंकि उनके अन्य सहयोगियों के बयान पहले ही दर्ज किए जा चुके हैं। ईडी इस मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ साक्ष्यों को नष्ट करने का गंभीर आरोप लगाने की तैयारी में है।

एजेंसी के पास कथित तौर पर 8 जनवरी के वीडियो फुटेज हैं, जिनमें मुख्यमंत्री और उनके सहयोगियों को आई-पैक के परिसर से दस्तावेज और डिजिटल उपकरण ले जाते हुए देखा गया है। उस समय केंद्रीय एजेंसी कोयला तस्करी मामले के संबंध में वहां तलाशी ले रही थी। ईडी इन फुटेज का उपयोग साक्ष्य मिटाने के एक अलग मामले में करने की योजना बना रही है। वैसे वीडियो के क्लोजअप में यह भी साफ नजर आया है कि ममता के हाथ में धरी हरे रंग की फाइल में टीएमसी प्रत्याशियों की कोई सूची थी।

आई-पैक पर बेहिसाब नकदी की लॉन्ड्रिंग का संदेह है। जांच में सामने आया है कि कोयला तस्करी के अपराध की कमाई को ठिकाने लगाने के लिए कुछ हवाला ऑपरेटरों ने आई-पैक को करोड़ों रुपये हस्तांतरित करने में मदद की थी। एजेंसी इस संबंध में पहले ही कई हवाला डीलरों से पूछताछ कर चुकी है।

ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में एक आपराधिक रिट याचिका दायर की है, जिसमें 8 जनवरी की तलाशी के दौरान बाधा डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। इस याचिका में ममता बनर्जी को प्रतिवादी नंबर 2 बनाया गया है। राज्य के डीजीपी राजीव कुमार (प्रतिवादी नंबर 3) और कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा (प्रतिवादी नंबर 4) को भी नोटिस जारी किए गए हैं। शीर्ष अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई फरवरी के पहले सप्ताह में तय की है।

मनी लॉन्ड्रिंग की यह जांच कोयला तस्करी के उस बड़े मामले से जुड़ी है, जिसमें मुख्य आरोपी अनूप माजी (उर्फ लाला) पर आरोप है कि उसने पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों (बांकुरा, वर्धमान, पुरुलिया) में ईसीएल क्षेत्रों से अवैध रूप से कोयला निकालकर बेचा। ईडी का दावा है कि मुख्यमंत्री ने छापेमारी के दौरान जबरन घुसकर न केवल प्रतीक जैन के आवास से सबूत जुटाए, बल्कि आई-पैक कार्यालय से भी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य हटवाए। दूसरी तरफ ममता बनर्जी ने खुले शब्दों में अपने पास कोयला चोरी के तमाम साक्ष्यों की पेन ड्राइव होने की चेतावनी दे रखी है।