राज्य सरकार का भाषण पढ़ने से किया इंकार
राष्ट्रीय खबर
चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में मंगलवार को एक बार फिर संवैधानिक टकराव की स्थिति देखने को मिली। राज्यपाल आर. एन. रवि लगातार तीसरे वर्ष राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए पारंपरिक अभिभाषण को पढ़े बिना ही विधानसभा से बाहर निकल गए। इस घटना ने सत्तारूढ़ दल और राजभवन के बीच चल रहे विवाद को और गहरा कर दिया है, जिसके बाद मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने राज्यपाल के अभिभाषण की प्रथा को ही समाप्त करने के लिए संविधान संशोधन की मांग उठा दी है।
राज्यपाल आर. एन. रवि ने अपना अभिभाषण न पढ़ने के पीछे 12 मुख्य कारण गिनाए हैं। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर आपत्ति जताई कि उनके संबोधन की शुरुआत में तमिल थाई वज़्थु (राज्य गान) के साथ राष्ट्रगान नहीं बजाया गया। राजभवन द्वारा जारी तीन पन्नों के बयान में आरोप लगाया गया कि विधानसभा में राज्यपाल का माइक्रोफोन बार-बार बंद किया गया और उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी गई। राज्यपाल के अनुसार, सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण में कई निराधार दावे और भ्रामक बयान शामिल थे, जो वास्तविक स्थिति से परे थे।
राजभवन के बयान में राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा गया कि अभिभाषण में जनता को परेशान करने वाले कई महत्वपूर्ण मुद्दों को नजरअंदाज किया गया है। बयान के अनुसार, लगभग सभी क्षेत्रों के निचले स्तर के कर्मचारियों में व्यापक असंतोष है। वे अशांत और निराश हैं, लेकिन उनकी वास्तविक शिकायतों को दूर करने के तरीकों का अभिभाषण में कोई उल्लेख नहीं किया गया।
राज्यपाल के सदन से बाहर जाने के बाद, मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने सदन की अनुमति से एक प्रस्ताव पेश किया, जिसके तहत सरकार द्वारा तैयार भाषण को पढ़ा हुआ मान लिया गया। इसके बाद अध्यक्ष एम. अप्पावु ने पूरे अभिभाषण का तमिल अनुवाद पढ़कर सुनाया।
स्टालिन ने राज्यपाल पर सदन का अपमान करने और परंपराओं के खिलाफ जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, यह केवल यहाँ नहीं, बल्कि पूरे देश में हो रहा है। हम समान विचारधारा वाले दलों के साथ मिलकर संविधान में आवश्यक संशोधन लाने के लिए काम करेंगे ताकि विधानसभा सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से करने की प्रथा को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।