Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
NEET-UG 2026 Paper Leak: सीबीआई की बड़ी कामयाबी, मास्टरमाइंड केमिस्ट्री लेक्चरर पी.वी. कुलकर्णी गिरफ... Punjab Politics: पंजाब में SIR को लेकर सियासी घमासान, चुनाव आयोग की सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने उठाए... Varanasi News: दालमंडी सड़क चौड़ीकरण तेज, 31 मई तक खाली होंगी 6 मस्जिदें समेत 187 संपत्तियां धार भोजशाला में मां सरस्वती का मंदिर, मुस्लिम पक्ष के लिए अलग जमीन… जानें हाई कोर्ट के फैसले में क्य... Ahmedabad-Dholera Rail: अहमदाबाद से धोलेरा अब सिर्फ 45 मिनट में, भारत की पहली स्वदेशी सेमी हाई-स्पीड... Namo Bharat FOB: निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन और सराय काले खां नमो भारत स्टेशन के बीच फुटओवर ब्रिज शुरू Sant Kabir Nagar News: मदरसा बुलडोजर कार्रवाई पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, डीएम और कमिश्नर का आदेश रद्द Patna News: बालगृह के बच्चों के लिए बिहार सरकार की बड़ी पहल, 14 ट्रेड में मिलेगी फ्री ट्रेनिंग और नौ... Mumbai Murder: मुंबई के आरे में सनसनीखेज हत्या, पत्नी के सामने प्रेमी का गला रेता; आरोपी गिरफ्तार Supreme Court News: फ्यूल संकट के बीच सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, वर्चुअल सुनवाई और वर्क फ्रॉम होम ...

पच्चीस साल के बाद ईयू और मर्कोसुर के बीच समझौता

वैश्विक कूटनीति के बदलने और ट्रंप की धमकियों का असर

असुनसियनः विश्व अर्थव्यवस्था के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा गया, जब यूरोपीय संघ और दक्षिण अमेरिकी देशों के संगठन मर्कोसुर ने अंततः एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर कर दिए। पैराग्वे की राजधानी, असुनसियन में आयोजित एक भव्य समारोह में इस समझौते पर मुहर लगी।

यह समझौता मात्र एक व्यापारिक संधि नहीं है, बल्कि यह दो महाद्वीपों के बीच 25 वर्षों से अधिक समय से चल रही जटिल वार्ताओं और कूटनीतिक उतार-चढ़ाव का सफल परिणाम है। दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति के तेवर ने भी इस समझौते को आगे बढ़ाने में प्रेरित किया है।

बढ़ते वैश्विक संरक्षणवाद और प्रमुख शक्तियों के बीच व्यापारिक तनाव के दौर में, इस समझौते को यूरोपीय संघ की एक बड़ी भू-राजनीतिक जीत माना जा रहा है। ऐसे समय में जब अमेरिकी टैरिफ और चीनी निर्यात का दबदबा बढ़ रहा है, ईयू ने इस संसाधन संपन्न क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। मर्कोसुर देशों (ब्राजील, अर्जेंटीना, उरुग्वे और पैराग्वे) के साथ यह साझेदारी यूरोप को दक्षिण अमेरिका के विशाल बाजार और वहां के प्राकृतिक संसाधनों तक आसान पहुंच प्रदान करेगी, जो वाशिंगटन और बीजिंग की प्रतिस्पर्धा के बीच ईयू को एक नई रणनीतिक बढ़त देती है।

यह समझौता दुनिया के सबसे बड़े मुक्त व्यापार क्षेत्रों में से एक का निर्माण करेगा, जो करीब 800 मिलियन लोगों की आबादी को कवर करता है। इसके तहत औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर लगने वाले अधिकांश सीमा शुल्क को हटा दिया जाएगा, जिससे दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक लागत में भारी कमी आएगी।

जहाँ मर्कोसुर देशों को अपने कृषि उत्पादों के लिए यूरोपीय बाजार मिलेगा, वहीं यूरोपीय कंपनियों को ऑटोमोबाइल, मशीनरी और फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में दक्षिण अमेरिका में नए अवसर मिलेंगे। हालांकि, पर्यावरण संबंधी चिंताओं और स्थानीय उद्योगों की सुरक्षा को लेकर कुछ चुनौतियाँ अब भी बनी हुई हैं, लेकिन यह हस्ताक्षर भविष्य की साझा समृद्धि की ओर एक मजबूत कदम है।