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परेशानी में भी अडिग है सोनम बांगचुक

जोधपुर जेल के एकांतवास की परिस्थितियां कठिन है

  • विषम परिस्थितियों में भी अटूट मनोबल

  • साहित्य के जरिए साझा करेंगे अनुभव

  • लद्दाख के अधिकारों की लड़ाई जारी है

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्लीः हालिया जानकारी के अनुसार, विख्यात जलवायु कार्यकर्ता और लद्दाख के प्रमुख सुधारक सोनम वांगचुक पिछले तीन महीनों से भी अधिक समय से जोधपुर जेल में एकांत कारावास में हैं। उनकी पत्नी, गीतांजलि आंग्मो ने हाल ही में उनके स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।

एक साक्षात्कार में गीतांजलि आंग्मो ने बताया कि जेल की स्थितियाँ अत्यंत कठिन और चुनौतीपूर्ण हैं। इसके बावजूद, वांगचुक के उत्साह और आशावाद में कोई कमी नहीं आई है। जहाँ आमतौर पर एकांत कारावास व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालता है, वहीं वांगचुक इसे एक अवसर के रूप में देख रहे हैं। आंग्मो के अनुसार, वांगचुक की भावनाएँ आज भी उतनी ही प्रबल हैं जितनी जेल जाने से पहले थीं।

कारावास के इस समय का सदुपयोग करते हुए, सोनम वांगचुक एक पुस्तक लिख रहे हैं। यह पुस्तक उनके जेल के अनुभवों, वहाँ की व्यवस्था और उनके व्यक्तिगत विचारों पर आधारित होगी। गीतांजलि ने खुलासा किया कि इस पुस्तक का संभावित शीर्षक फॉरएवर पॉजिटिव रखा गया है। यह शीर्षक न केवल वांगचुक के जीवन दर्शन को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि वे विपरीत परिस्थितियों में भी सकारात्मकता को कैसे बनाए रखते हैं।

गौरतलब है कि सोनम वांगचुक को लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर किए जा रहे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिया गया था। वे लद्दाख के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने और स्थानीय लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए एक लंबी पदयात्रा पर थे।

गीतांजलि ने जोर देकर कहा कि वांगचुक का यह संघर्ष केवल लद्दाख के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के लिए है। जेल की दीवारें उनके विचारों को कैद नहीं कर पाई हैं, और उनकी आने वाली पुस्तक इस संघर्ष का एक दस्तावेज साबित होगी। यह पुस्तक पाठकों को यह समझने में मदद करेगी कि एक कार्यकर्ता के लिए उसकी विचारधारा और संकल्प किसी भी भौतिक बाधा से कहीं अधिक शक्तिशाली होते हैं।