पुरानी नौका की उम्र 52 सौ साल आंकी गयी
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कार्बन डेटिंग से समय की पुष्टि की गयी
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पेड़ प्रबंधन की उन्नत तकनीक की खोज
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भविष्य के शोध का महत्व इससे जुड़ा
राष्ट्रीय खबर
रांचीः पुरातत्वविदों ने हाल ही में अमेरिका की एक झील के तल से एक ऐसी खोज की है जिसने मानव सभ्यता के विकासक्रम से जुड़ी धारणाओं को चुनौती दे दी है। शोधकर्ताओं को लगभग 5,200 साल पुरानी एक लकड़ी की नौका के अवशेष मिले हैं। यह खोज न केवल अपनी उम्र के कारण महत्वपूर्ण है, बल्कि इसलिए भी क्योंकि यह उस समय के मनुष्यों के तकनीकी कौशल और प्रकृति के साथ उनके गहरे संबंधों को उजागर करती है।
यह नौका उस समय की है जब दुनिया के कई हिस्सों में शहरी सभ्यताएं अभी अपनी शुरुआती अवस्था में थीं। कार्बन डेटिंग से पुष्टि हुई है कि यह लकड़ी का ढांचा पांच सहस्राब्दियों से अधिक पुराना है। यह खोज इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि प्राचीन आदिवासी समुदायों के पास जलमार्गों का उपयोग करने के लिए परिष्कृत साधन मौजूद थे।
वैज्ञानिकों के लिए सबसे आश्चर्यजनक बात इस नौका का निर्माण कौशल है। यह एक ही विशाल पेड़ के तने को खोखला करके बनाई गई है। शोध में पाया गया है कि इसे बनाने के लिए केवल पत्थरों के औजारों का नहीं, बल्कि अग्नि नियंत्रण तकनीक का भी उपयोग किया गया था, ताकि लकड़ी को आकार देना आसान हो सके।
इस खोज की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह प्राचीन लोगों द्वारा सिल्विकल्चर या वन प्रबंधन के शुरुआती संकेतों को दर्शाती है। साक्ष्यों से पता चलता है कि उस समय के लोग पेड़ों की विकास प्रक्रिया को समझते थे। वे चुनिंदा पेड़ों को इस तरह से बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे या उनके तनों को इस प्रकार ट्रिम करते थे कि भविष्य में उनसे लंबी और सीधी नौकाएं बनाई जा सकें। यह इस बात का सबूत है कि 5,000 साल पहले का मानव केवल ‘शिकारी’ नहीं था, बल्कि एक कुशल इंजीनियर और पर्यावरण प्रबंधक भी था।
झील के ठंडे पानी और तलछट के नीचे दबे होने के कारण यह लकड़ी अभी तक सुरक्षित रही। वर्तमान में, विशेषज्ञ इस लकड़ी के सेलुलर ढांचे का अध्ययन कर रहे हैं ताकि उस समय की जलवायु और वनस्पति के बारे में अधिक जानकारी जुटाई जा सके। यह नौका हमें बताती है कि प्राचीन समुदायों के लिए जल परिवहन व्यापार, भोजन और सामाजिक संपर्क का मुख्य आधार था।
यह खोज इस मिथक को तोड़ती है कि प्राचीन तकनीकें आदिम और सरल थीं; इसके विपरीत, यह हमें एक ऐसी सभ्यता की याद दिलाती है जो संसाधनों का स्थायी उपयोग करना बखूबी जानती थी।
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