कोलकाता हाईकोर्ट ने पहले उन्हें अयोग्य घोषित किया था
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हाईकोर्ट ने सदस्यता खारिज कर दी थी
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भाजपा ने उनपर आरोप लगाया था
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इसका अधिकार विधानसभा अध्यक्ष के पास
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा हस्तक्षेप किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें मुकुल रॉय को पश्चिम बंगाल विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। यह मामला दल-बदल विरोधी कानून से जुड़ा है, जो लंबे समय से कानूनी और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
मुकुल रॉय, जिन्होंने 2021 का विधानसभा चुनाव भाजपा के टिकट पर जीता था, चुनाव के तुरंत बाद अपनी पुरानी पार्टी तृणमूल कांग्रेस में वापस लौट आए थे। इसके बाद भाजपा ने विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के समक्ष उनकी सदस्यता रद्द करने की याचिका दायर की थी। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें अयोग्य ठहराने का निर्णय सुनाया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की हालिया रोक ने रॉय को फिलहाल एक बड़ी राहत दी है और उनकी विधायक के तौर पर सदस्यता बरकरार रहेगी।
शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि विधानसभा अध्यक्ष के पास इस तरह के मामलों में निर्णय लेने का प्राथमिक अधिकार होता है और न्यायिक समीक्षा की अपनी सीमाएं हैं। इस स्थगन आदेश का मतलब है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अंतिम सुनवाई पूरी नहीं कर लेता, तब तक मुकुल रॉय विधानसभा की कार्यवाही में भाग ले सकते हैं। इस घटनाक्रम ने बंगाल में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रहे कानूनी युद्ध को एक नया मोड़ दे दिया है। विपक्ष का आरोप है कि ऐसे मामले लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन करते हैं, जबकि रॉय के समर्थकों का मानना है कि यह कानूनी प्रक्रिया की जीत है। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो भविष्य के दल-बदल मामलों के लिए एक नजीर बन सकता है।