Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Hyderabad Fire Tragedy: हैदराबाद फर्नीचर शोरूम में भीषण आग, बेसमेंट में जिंदा जले 5 लोग, 22 घंटे बाद... अकील अख्तर ने थामा पतंग का साथ! झारखंड में AIMIM का बड़ा दांव, पाकुड़ की राजनीति में मचेगी हलचल मिर्जापुर जिम धर्मांतरण मामला: कोर्ट ने आरोपी इमरान को भेजा जेल, 14 दिन की जुडिशियल रिमांड पर फैसला Singrauli Mine Collapse: सिंगरौली में बड़ा हादसा, मिट्टी की खदान धंसने से 3 लोगों की मौत, 2 की हालत ... MBMC Election Results 2026: मीरा भयंदर में बीजेपी का दबदबा, लेकिन मेयर की कुर्सी के लिए विपक्षी एकजु... देश की नौकरशाही पर लगाम कसने की नई चाल Suicide Case: पिता ने टोकना तो नाराज हुआ बेटा, ऑटो के अंदर फंदा लगाकर दी जान; परिजनों का रो-रोकर बुर... शंकराचार्य मुद्दे पर योगी और केशव मौर्य की तल्खी Gwalior Crime: ग्वालियर में 'लुटेरी दुल्हन' गैंग का भंडाफोड़, शादी के नाम पर ठगने वाली दुल्हन समेत 7... तेजस्वी यादव राजद के कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त

Comrade Mahendra Singh: मौत के सामने भी नहीं झुके महेंद्र सिंह, जानें उस दिन की पूरी कहानी जब गोलियों से छलनी किया गया जननेता का सीना

गिरिडीहः एके 47 जैसे खतरनाक रायफल को सामने तना देखकर भी सच बोलने की हिम्मत रखने वाले शख्स का नाम था महेंद्र सिंह, जिनकी आज 21वीं पुण्यतिथि है. इस मौके पर बगोदर बस स्टैंड परिसर में भाकपा माले के द्वारा जन संकल्प सभा का आयोजन किया गया है. भाकपा माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य सभा को बतौर मुख्य अतिथि शामिल हो रहे हैं.

उनकी पहचान जनता के दिलों में है

शहादत दिवस को लेकर बगोदर बाजार सहित ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लाल झंडे लगाए गए हैं. पुलिस की कार्रवाई, महाजनी प्रथा, भ्रष्टाचार के खिलाफ एवं शोषितों और पीड़ितों के अधिकार के लिए सड़क से सदन तक दहाड़ मारने वाले शख्स का नाम था महेंद्र सिंह. इन्हीं सब गुणों के कारण ही अन्य जनप्रतिनिधियों से महेंद्र सिंह की अलग पहचान थी. यही पहचान उनकी शहादत के 21 सालों बाद भी आम जनता, किसान, मजदूरों, छात्र – छात्राओं आदि को अपनी ओर खींच लाती है और शहादत पर सलाम करने के लिए आज भी हजारों मुठ्ठियां तनी दिखती हैं.

जी हां यह वही महेंद्र सिंह थे जिन्होंने बगोदर में लगातार तीन बार विधानसभा का चुनाव जीतकर इलाके का प्रतिनिधित्व किया था. वो गरीबों, मजलूमों, शोषितों, दलितों की विधानसभा में आवाज बनकर उभरे.

2005 झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए वह चौथी बार तैयारी कर रहे थे. 21 साल पूर्व 2005 में आज ही के दिन 16 जनवरी को अपराधियों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी. एके 47 ताने अपराधियों ने जब भीड़ में पूछा कि इसमें कौन है महेंद्र सिंह, तब उन्होंने अपराधियों के सामने आकर बोला, जी मैं हूं महेंद्र सिंह, बोलिए क्या बात है. यही उनकी अंतिम बातें थीं और अपराधियों ने इतना सुनते ही उनके सीने में गोली मार दी.

शहीद महेंद्र सिंह एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक विचार थे

उनकी हत्या के बाद आम जनमानस ने यह जता दिया कि अपराधियों ने भले हीं महेंद्र सिंह की हत्या कर दी लेकिन उनके विचार आज भी जिंदा हैं. उनकी हत्या के बाद पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए और वह भी ठंड के मौसम में उमड़े जन सैलाब ने यह बता दिया था कि वह एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक विचार थे. उनकी हत्या कर उनके विचारों को दबाया नहीं जा सकता है.