Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच 'सुपर' रेस्क्यू! ईरान से सुरक्षित निकले 550 भारतीय; एस. जयशंकर ने बताया... Ladakh Protest: लद्दाख में भारी विरोध प्रदर्शन, 6वीं अनुसूची और राज्य के दर्जे की मांग तेज; सोनम वां... नजारा ऐसा कि पेरिस भूल जाएंगे! श्रीनगर में खुला एशिया का सबसे बड़ा 'ट्यूलिप गार्डन'; 18 लाख फूलों की... संभल प्रशासन को हाई कोर्ट का बड़ा झटका! नमाज पर पाबंदी वाला आदेश रद्द; अदालत ने कहा- 'नमाजियों की सुर... Supaul News: सुपौल में सफाई व्यवस्था ठप, धरने पर बैठे नगर परिषद के कर्मचारी; कूड़े के ढेर में तब्दील... भोजशाला विवाद पर हाई कोर्ट का 'सुपर' एक्शन! नियमित सुनवाई से पहले होगा मौका-मुआयना, 2 अप्रैल से शुरू... Ghaziabad Crime: छुट्टी के विवाद में बैंक गार्ड ने मैनेजर को मारी गोली, पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्... दिल्ली में बनेगा AIIMS जैसा 'सुपर मेडिकल हब'! एक साथ मिलाए जाएंगे 3 बड़े सरकारी अस्पताल; मरीजों को ए... Weather Update Today: यूपी-बिहार में बारिश की चेतावनी, दिल्ली और पंजाब में लुढ़का तापमान; जानें अगले... Delhi Free Bus Travel: ट्रांसजेंडर यात्रियों के लिए दिल्ली की बसों में मुफ्त यात्रा शुरू, कैबिनेट की...

धान की कमी पर छत्तीसगढ़ सरकार की अजीब दलील! बोली— चूहे, कीड़े और सूखत ‘स्वाभाविक प्रक्रिया’, जानें क्या है वैज्ञानिक तर्क

रायपुर: छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि धान खरीदी एवं भंडारण व्यवस्था में सूखत एवं चूहा, कीटों के द्वारा धान के नुकसान को लेकर कुछ स्थानों पर जो भ्रम फैलाया जा रहा है, वह तथ्यों से परे है. धान भंडारण के दौरान नमी में कमी के कारण वजन में आंशिक गिरावट (सूखत) एक स्वाभाविक और तकनीकी प्रक्रिया है, जो वर्षों से चली आ रही है और देश के सभी धान उत्पादक राज्यों में देखी जाती है.

धान सूखत पर सरकार का स्पष्टीकरण

सरकारी अभिलेखों के अनुसार खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में 6.32 प्रतिशत और 2020-21 में 4.17 प्रतिशत सूखत दर्ज की गई थी. ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि सूखत कोई नई या अचानक उत्पन्न हुई स्थिति नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर चलने वाली भौतिक-तकनीकी प्रक्रिया है.

धान संग्रहण केंद्रों में नमी, तापमान, भंडारण अवधि, परिवहन और वातावरण के प्रभाव से धान में प्राकृतिक रूप से कुछ प्रतिशत वजन घटता है. इसे वैज्ञानिक रूप से मॉइस्चर लॉस या ड्रायिंग लॉस कहा जाता है. इस प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता, लेकिन इसे नियंत्रित, मापा और पारदर्शी बनाया जा सकता है

खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में लगभग 3.49 प्रतिशत सूखत की संभावना व्यक्त की गई है, जो पूर्व वर्षों के औसत के अनुरूप है और असामान्य नहीं है.

वर्तमान धान खरीदी व्यवस्था में संग्रहण केंद्रों पर डिजिटल स्टॉक एंट्री, वजन सत्यापन, गुणवत्ता परीक्षण, गोदाम ट्रैकिंग, परिवहन एवं उठाव की निगरानी जैसी व्यवस्थाएँ लागू की गई हैं, ताकि किसी भी स्तर पर अनियमितता को तुरंत पहचाना जा सके. अब सूखत केवल एक अनुमान नहीं, बल्कि डेटा-आधारित और ट्रैक-योग्य प्रक्रिया बन चुकी है. जहां यह प्राकृतिक सीमा में रहती है, उसे सामान्य माना जाता है, और जहां यह असामान्य रूप से अधिक पाई जाती है, वहां जांच और उत्तरदायित्व तय किया जाता है.

धान खरीदी व्यवस्था का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को उनके धान का पूरा और न्यायसंगत मूल्य मिले, भंडारण में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न हो और पूरी प्रणाली विश्वसनीय और पारदर्शी बनी रहे.

मुख्यमंत्री कार्यालय से बताया गया कि प्रदेश की धान खरीदी प्रणाली डिजिटल टोकन, ऑनलाइन भुगतान, स्टॉक ट्रैकिंग और शिकायत निवारण जैसी सुविधाओं के माध्यम से देश की सबसे संगठित और निगरानी-आधारित व्यवस्थाओं में शामिल हो चुकी है. इससे किसानों का विश्वास मजबूत हुआ है और प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ी है. इसलिए यह स्पष्ट किया जाता है कि सूखत भंडारण की एक वैज्ञानिक वास्तविकता है, जिसे अब पहली बार पूरी पारदर्शिता, निगरानी और नियंत्रण के साथ संचालित किया जा रहा है.

छत्तीसगढ़ धान खरीदी में रिकॉर्ड

खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में अब तक 17,77,419 किसानों से 105.14 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है, जिसके एवज में किसानों को ₹23,448 करोड़ की रिकॉर्ड राशि का भुगतान किया गया है. यह अब तक के सभी वर्षों की तुलना में 13 जनवरी तक की सबसे अधिक खरीदी और सबसे अधिक भुगतान है.

पिछले वर्षों के 13 जनवरी तक के आंकड़ों से तुलना की जाए तो खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में 13 जनवरी तक 17,49,003 किसानों से 72.15 LMT धान की खरीदी की गई थी और ₹13,550 करोड़ का भुगतान हुआ था. वर्ष 2021-22 में इसी अवधि तक 17,09,834 किसानों से 68.77 LMT धान खरीदा गया था, जिसके बदले ₹13,410 करोड़ किसानों को दिए गए थे.

खरीफ विपणन वर्ष 2022-23 में 13 जनवरी तक 22,14,302 किसानों से 97.67 LMT धान की खरीदी की गई थी और ₹20,022 करोड़ का भुगतान हुआ था. इन सभी वर्षों की तुलना में वर्ष 2025-26 में धान खरीदी की मात्रा और किसानों को वितरित की गई राशि दोनों ही उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी हैं.

आंकड़ों से स्पष्ट है कि जहां 2020-21 में 72.15 LMT, 2021-22 में 68.77 LMT और 2022-23 में 97.67 LMT धान खरीदा गया था, वहीं 2025-26 में मात्र 13 जनवरी तक ही 105.14 LMT धान खरीदा जा चुका है, जो अपने-आप में एक नया रिकॉर्ड है. इसी तरह किसानों को मिलने वाली राशि भी सीधे बढ़कर ₹23,448 करोड़ तक पहुंच गई है.