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लेबनान की बेका घाटी पर इजरायली हमला

मध्य पूर्व में हिंसा का दौर थमने के आसार नहीं दिख रहे

तेल अवीवः मध्य पूर्व में जारी संघर्ष एक बार फिर विनाशकारी मोड़ पर पहुँच गया है। लेबनान की बेका घाटी में हुआ ताजा सैन्य हमला इस बात का प्रमाण है कि क्षेत्र में शांति की संभावनाएं फिलहाल धूमिल होती जा रही हैं। इजरायली वायुसेना और तोपखाने द्वारा किए गए इस हमले ने न केवल भौतिक क्षति पहुँचाई है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और मानवीय स्थिरता के लिए भी गंभीर संकट पैदा कर दिया है।

इजरायली रक्षा बल  के आधिकारिक प्रवक्ता ने इस हमले की पुष्टि करते हुए इसे निवारक कार्रवाई करार दिया है। इजरायल का दावा है कि उसके खुफिया तंत्र को बेका घाटी के इस विशिष्ट क्षेत्र में हिजबुल्लाह के रॉकेट लॉन्च पैड और हथियारों के भंडारण की सटीक जानकारी मिली थी।

इजरायल का तर्क है कि सीमावर्ती शहरों पर होने वाले हमलों को रोकने के लिए इन ठिकानों को नष्ट करना उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपरिहार्य था। इजरायल लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि सशस्त्र समूह नागरिक बुनियादी ढांचे का उपयोग अपनी सैन्य गतिविधियों के लिए ढाल के रूप में करते हैं।

इसके विपरीत, लेबनानी मीडिया और जमीनी स्तर पर काम कर रहे बचाव कर्मियों ने एक भयावह तस्वीर पेश की है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, हमले के दौरान गिरे मिसाइलों ने रिहायशी इमारतों को मलबे में तब्दील कर दिया है। इस हमले में निर्दोष नागरिकों के हताहत होने की खबरें हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं।

लेबनान सरकार ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता का नग्न उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का अपमान बताया है। लेबनानी विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है ताकि इजरायली आक्रामकता पर लगाम लगाई जा सके।

बेका घाटी का संघर्ष के केंद्र में होना कोई संयोग नहीं है। यह क्षेत्र भौगोलिक और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इस क्षेत्र को ऐतिहासिक रूप से हिजबुल्लाह का मजबूत राजनीतिक और सैन्य गढ़ माना जाता है। सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह घाटी पड़ोसी देशों से हथियारों की आवाजाही के लिए एक प्रमुख गलियारे के रूप में उपयोग की जाती है। यहाँ बड़ी आबादी निवास करती है, जिसके कारण सैन्य हमलों में नागरिक हताहतों की संख्या बढ़ने का जोखिम हमेशा बना रहता है।

इस हमले के बाद पूरे लेबनान में भय और अनिश्चितता का माहौल है। स्थानीय अस्पतालों में घायलों की बढ़ती संख्या के कारण चिकित्सा संसाधनों की भारी कमी देखी जा रही है। युद्ध के डर से हजारों लोग अपने पैतृक घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं, जिससे एक नया शरणार्थी संकट पैदा होने की आशंका है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र ने दोनों पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि सीमा पार हमलों का यह सिलसिला नहीं थमा, तो यह छिटपुट हिंसा एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकती है, जिसके परिणाम पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी होंगे।