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रांची में बच्चा बरामदगी पर बोले नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल, पुलिस ले रही है श्रेय लेकिन असली हीरो तो…

रांची: राजधानी रांची के धुर्वा से रहस्यमय ढंग से गुम हुए दोनों बच्चों की बरामदगी के बाद भले ही झारखंड पुलिस फीलगुड में है लेकिन पूरे प्रकरण में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि अंश और अंशिका की बरामदगी के हीरो रामगढ़ के बजरंग दल के कार्यकर्ता सचिन प्रजापति, डब्ल्यू साहू, सन्नी और उनके साथी हैं.

वास्तविकता कुछ और है: बाबूलाल मरांडी

बाबूलाल मरांडी ने दोनों बच्चों के सकुशल बरामदगी में इन लोगों की सराहनीय भूमिका होने के लिए सरकार की ओर से इन्हें घोषित इनाम और सम्मानित करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन अपनी पीठ थप थपा रही है, यहां तक कि हटिया डीएसपी पटाखे छोड़ रहे हैं जबकि वास्तविकता कुछ और है. यदि पुलिस प्रशासन इतनी ही चुस्त रहती तो घटना के तुरंत बाद मुहिम चलाई जाती तो इतने दिनों तक बच्चे गायब नहीं रहते. बाबूलाल मरांडी ने कहा झारखंड से लगातार हर साल सैकड़ों बच्चे गुम हो रहे हैं और पुलिस प्रशासन उसे ढूंढ नहीं पा रही है.

जेजे एक्ट को भूल गई झारखंड पुलिस: बाबूलाल मरांडी

नेता प्रतिपक्ष ने बच्चों की बरामदगी के बाद पुलिस द्वारा कानून का उल्लंघन किए जाने की बात कहते हुए कहा कि पहले सीडब्ल्यूसी को सौंपा जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ और इसे पहले मीडिया के समक्ष सार्वजनिक किया गया और बाद में बताया गया तो शाम में लोहरदगा से सीडब्ल्यूसी के लोगों को बुलाकर प्रक्रिया पूरी की गई. सबसे दुखद बात है कि रांची में दो साल से सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष का पद खाली है, ऐसे में समझा जा सकता है कि राज्य सरकार कितनी गंभीर है.

बीजेपी नेता ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए बताया कि एसीबी ने जिस तरह से पिछले दिनों एक केस में, विनय चौबे एवं अन्य अधिकारी और उससे जुड़े आरोपियों को बचाने का काम किया था, इससे साफ पता चलता है कि पुलिस प्रशासन किस तरह से काम कर रही है.

‘भ्रष्टाचारियों’ को बचाने में लगी है राज्य सरकार: नेता प्रतिपक्ष

ईडी कार्यालय में रांची पुलिस के पहुंचने पर सवाल खड़े करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह से एक केस में आरोपी संतोष कुमार ने ईडी अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए एयरपोर्ट थाना में कांड दर्ज करके पूरे केस को डायवर्ट करने की कोशिश की है और उसके बाद रांची पुलिस वहां पहुंचती है, उससे साफ होता है कि राज्य सरकार, किस तरह से ‘भ्रष्टाचारियों’ को बचाने में लगी हुई है.