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अब चिकित्सकों की नजरों से भी बेहतर झांक रहा ए आई

खून की जांच में बेहतर परिणाम का प्रदर्शन

  • डॉक्टरों की थकान और एआई की मदद

  • जांच की बेजोड़ सटीकता की पुष्टि हुई

  • क्राइटोडिफ्यूजन नामक यह सिस्टम है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः रक्त कोशिकाओं की बनावट और संरचना का विश्लेषण करने वाले एक नए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम ने चिकित्सा जगत में नई उम्मीद जगाई है। यह तकनीक ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) जैसी गंभीर बीमारियों के निदान में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह टूल मानव विशेषज्ञों की तुलना में अधिक सटीकता और निरंतरता के साथ असामान्य कोशिकाओं की पहचान कर सकता है, जिससे गलत या अनिश्चित निदान की संभावना कम हो जाती है।

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क्राइटोडिफ्यूजन नामक यह सिस्टम जेनरेटिव एआई पर आधारित है—वही तकनीक जो डेल ई जैसे इमेज जनरेटर में इस्तेमाल होती है। यह सूक्ष्मदर्शी (माइक्रोस्कोप) के नीचे कोशिकाओं के दिखने के सूक्ष्म अंतरों का अध्ययन करता है।

जहां पुराने एआई टूल केवल पूर्व-निर्धारित श्रेणियों में काम करते थे, वहीं क्राइटोडिफ्यूजन सामान्य और दुर्लभ, दोनों तरह की कोशिकाओं के बीच के बारीक अंतर को पहचान कर बीमारी का संकेत देने वाली असामान्य कोशिकाओं को फ्लैग कर सकता है। कैंब्रिज विश्वविद्यालय, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन और क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित इस तकनीक के निष्कर्ष नेचर मशीन इंटेलिजेंस में प्रकाशित हुए हैं।

खून की एक सामान्य जांच में हजारों कोशिकाएं होती हैं, जिन्हें एक इंसान के लिए एक-एक करके बारीकी से देखना असंभव है। अध्ययन के प्रमुख लेखक साइमन डेल्टाडाहल के अनुसार, इंसान सभी कोशिकाओं को नहीं देख सकते, लेकिन हमारा मॉडल इस प्रक्रिया को स्वचालित कर सकता है और संदिग्ध मामलों को मानवीय समीक्षा के लिए अलग कर सकता है। डॉ. सुतेश शिवपलारत्नम ने बताया कि एक जूनियर डॉक्टर के रूप में काम करते हुए घंटों खून की जांच करने के बाद थकान के कारण गलतियों की संभावना रहती है, जिसे एआई बेहतर तरीके से संभाल सकता है।

क्राइटोडिफ्यूजन को कैंब्रिज के एडनब्रुक अस्पताल से एकत्रित 5 लाख से अधिक रक्त छवियों पर प्रशिक्षित किया गया है। परीक्षण के दौरान, इसने ल्यूकेमिया से जुड़ी कोशिकाओं को पहचानने में मौजूदा प्रणालियों और इंसानों से बेहतर प्रदर्शन किया।

इस एआई की सबसे बड़ी खासियत इसकी अनिश्चितता को समझने की क्षमता है। डेल्टाडाहल कहते हैं, इंसान कभी-कभी गलत होने पर भी आश्वस्त हो सकते हैं, लेकिन यह मॉडल तभी परिणाम देता है जब वह पूरी तरह सुनिश्चित हो। अगर वह अनिश्चित है, तो वह उसे स्पष्ट कर देता है।

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