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रांची पुलिस की अथक कोशिश के बाद बरामद हुए मासूम अंश और अंशिका, डीजीपी ने एसएसपी सहित पूरी टीम को दी बधाई

रांची: झारखंड पुलिस ने एक बार फिर अपनी कुशलता और टीम वर्क का परिचय दिया है. रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र के मौसीबाड़ी खटाल से 2 जनवरी को लापता हुए दो मासूम बच्चे अंश और अंशिका को पुलिस ने रामगढ़ जिले के चितरपुर इलाके से सकुशल बरामद कर लिया.

मानव तस्कर गिरोह का नेटवर्क

झारखंड पुलिस मुख्यालय में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान डीजीपी तदाशा मिश्रा ने बताया कि यह एक बहुत बड़ा गिरोह है. फिलहाल मामले को पूरी तरह से गुप्त इसलिए रखा जा रहा है क्योंकि इसमें एक बड़े नेटवर्क को पकड़ना है. वहीं, बच्चों के सकुशल वापसी के बाद सीआईडी एडीजी मनोज कौशिक ने बताया कि फिलहाल अभी इस नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए पुलिस की टीम काम कर रही है. बच्चों को किस तरह से ले जाया गया था और उन्हें कहां-कहां रखा गया था इसकी जानकारी बाद में उपलब्ध कराई जाएगी.

डीजीपी ने दी जानकारी

बच्चों की सुरक्षित वापसी पर डीजीपी ने रांची पुलिस की सराहना की और एसएसपी राकेश रंजन सहित पूरी टीम को बधाई दी. पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीजीपी तदाशा मिश्र ने कहा कि रांची पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विशेष अभियान चलाया, जिसके तहत स्पेशल टीम ने बच्चों को बरामद किया. उन्होंने एसएसपी राकेश रंजन के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि पूरी टीम ने अत्यंत संवेदनशीलता के साथ मामले को संभाला. डीजीपी ने अभियान में शामिल सभी पुलिसकर्मियों को हार्दिक बधाई दी और कहा कि यह सफलता पुलिस की लगातार निगरानी और तकनीकी सहायता का परिणाम है.

बच्चों के परिजनों ने दी धन्यवाद

बच्चों के माता-पिता ने रांची पुलिस को धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा, “रांची पुलिस को बहुत-बहुत बधाई. हमारी खुशी का ठिकाना नहीं है. पुलिस ने इतनी तत्परता दिखाई कि हमारे बच्चे सुरक्षित लौट आए”. परिजनों ने बताया कि 2 जनवरी को बच्चे घर से लापता हो गए थे, जिसके बाद उन्होंने तुरंत धुर्वा थाने में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी निगरानी और मुखबिरों की मदद से आरोपी ट्रेस किए.

दो आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी

विशेष अभियान के दौरान पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया है. प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि आरोपी बच्चों को चितरपुर ले गए थे. फिलहाल, रांची पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है. डीजीपी ने स्पष्ट किया कि अपराधियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी. दोनों बच्चे अब अपने परिजनों के सुपुर्द कर दिए गए हैं. यह घटना झारखंड पुलिस की अपराध नियंत्रण और बच्चों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है. ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई से पुलिस की छवि और मजबूत हुई है.