पनडुब्बी, मिसाइल और ड्रोन की भी तैनाती
नई दिल्ली: रणनीतिक रूप से संवेदनशील सर क्रीक क्षेत्र और मकरान तट के पास पाकिस्तान की हालिया सैन्य गतिविधियों ने दक्षिण एशिया में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। उच्च स्तरीय रक्षा सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान इस क्षेत्र में एक व्यापक ‘सैन्य पुनर्गठन’ अभियान चला रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य भारत के साथ लगने वाली समुद्री सीमा और विवादित दलदली इलाकों में अपनी स्थिति को और अधिक आक्रामक बनाना है।
पाकिस्तान ने अपनी हवाई सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए अमेरिकी और चीनी तकनीक से लैस एक सघन रडार नेटवर्क स्थापित किया है। सूत्रों के मुताबिक, मकरान तट पर यह नेटवर्क बहुस्तरीय है, जिसमें कम, मध्यम और लंबी दूरी के रडार शामिल हैं। इनमें से कुछ रडार 1,000 किलोमीटर तक की दूरी पर नजर रखने में सक्षम हैं, जो भारतीय हवाई क्षेत्र की गतिविधियों को गहराई से ट्रैक कर सकते हैं। इस रडार जाल को मजबूत करने के लिए वहां सतह से हवा में मार करने वाली अत्याधुनिक मिसाइलों (सैम) की भी तैनाती की गई है।
जमीनी और समुद्री मोर्चे पर अपनी ताकत बढ़ाने के लिए पाकिस्तान ने लगभग 3,000 सैनिकों और अधिकारियों की एक नई मरीन ब्रिगेड को पूरी तरह से तैयार कर लिया है। यह ब्रिगेड विशेष रूप से सर क्रीक जैसे कठिन और दलदली क्षेत्रों में युद्ध लड़ने के लिए प्रशिक्षित है। इसके अलावा, सीमावर्ती इलाकों में लगातार ड्रोन्स की आवाजाही देखी गई है, जो निगरानी और संभावित हमले, दोनों के लिए उपयोग किए जा रहे हैं।
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान का यह जमावड़ा असममित युद्ध की रणनीति का हिस्सा है। सर क्रीक, जो सिंधु नदी के मुहाने पर स्थित 96 किलोमीटर लंबा एक ज्वारीय मुहाना है, लंबे समय से भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का विषय रहा है। पाकिस्तान पूरे क्रीक पर अपना दावा करता है, जबकि भारत थलवेग सिद्धांत के आधार पर इसके बीच से सीमा रेखा खींचने की वकालत करता है। पाकिस्तान का वर्तमान सैन्य विस्तार इस विवादित क्षेत्र में यथास्थिति को बदलने और समुद्री आर्थिक क्षेत्र पर नियंत्रण हासिल करने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।