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पीएम मोदी ने ट्रंप से फोन पर बात नहीं की

भारत अमेरिका व्यापार समझौता पर लुटनिक ने दी जानकारी

  • अमेरिकी वाणिज्य सचिव का नया खुलासा

  • हमने तीन बार का समय भारत को दिया

  • मोदी ने राष्ट्रपति कार्यालय से बात नहीं की

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः अमेरिकी वाणिज्य सचिव हावर्ड लुटनिक ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौता इसलिए नहीं हो सका क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को फोन नहीं किया। गुरुवार को ऑल-इन पॉडकास्ट को दिए एक साक्षात्कार में लुटनिक ने उन कूटनीतिक बारीकियों का विवरण दिया, जिनकी वजह से यह डील अधर में लटक गई। लुटनिक ने बताया कि ट्रम्प प्रशासन में व्यापारिक सौदे एक सीढ़ी की तरह होते हैं, जहाँ पहले आने वाले को सबसे अच्छा सौदा मिलता है।

लुटनिक ने ब्रिटेन का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने ब्रिटेन को एक निश्चित समय सीमा दी थी। उन्होंने कहा, मैंने ब्रिटेन के साथ पहला सौदा किया और उन्हें स्पष्ट कर दिया था कि इसे दो शुक्रवारों के भीतर पूरा करना होगा, क्योंकि ट्रेन स्टेशन से छूटने वाली थी। राष्ट्रपति ट्रम्प की रणनीति यह है कि जो देश सबसे पहले बातचीत की मेज पर आता है, उसे सबसे अधिक लाभ मिलता है। एक बार पहली सीढ़ी भरने के बाद, बाद में आने वालों को वैसा लाभ नहीं मिल पाता। लुटनिक के अनुसार, ट्रम्प जानबूझकर ऐसा करते हैं ताकि दूसरे देश जल्द से जल्द समझौते के लिए प्रोत्साहित हों।

उन्होंने याद किया कि ब्रिटेन के साथ डील होने के बाद जब ट्रम्प से अगले देश के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने सार्वजनिक रूप से कई बार भारत का नाम लिया। लुटनिक ने कहा, हम भारत के साथ बातचीत कर रहे थे और हमने उन्हें तीन शुक्रवार का समय दिया था। मैं अनुबंधों की बातचीत करता हूँ और पूरा ढांचा तैयार करता हूँ, लेकिन अंततः यह ट्रम्प की डील होती है। वह इसे अंतिम रूप देने वाले हैं। मैंने भारतीय पक्ष से कहा था कि सब कुछ तैयार है, बस प्रधानमंत्री मोदी को राष्ट्रपति ट्रम्प को एक कॉल करना होगा।

लुटनिक के अनुसार, भारतीय पक्ष राष्ट्रपति को सीधे कॉल करने में असहज महसूस कर रहा था, जिसके कारण पीएम मोदी ने फोन नहीं किया। परिणामस्वरूप, वह समय सीमा निकल गई। लुटनिक ने बताया कि उस शुक्रवार के बाद, अमेरिका ने आगे बढ़ते हुए इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम के साथ अपने व्यापारिक समझौतों की घोषणा कर दी। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ताओं में व्यक्तिगत संवाद और समयबद्धता कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।