Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
यूएसजीएस के वैज्ञानिकों की नजर अब किलाऊआ ज्वालामुखी पर स्पेन में सत्ता विरोधी आंदोलन जोर पकड़ता जा रहाहै फ्रांस में इजरायली सुरक्षा मंत्री बेन ग्विर पर प्रतिबंध Strait of Hormuz Updates: क्या है होर्मुज का नया सर्विस प्रोटोकॉल? जहां से होती है दुनिया की 20% तेल... Indore Honeytrap Case: इंदौर हनीट्रैप मामले में बड़ा एक्शन; श्वेता विजय जैन समेत 7 आरोपी भेजे गए जेल PoK Terror Network: 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद PoK में फिर सक्रिय हुआ लश्कर; हाफिज सईद के बेटे ने पूर्व ... खसरे के प्रकोप से 500 से अधिक बच्चों की मौत Supreme Court Judgement: सैनिटरी पैड और शौचालय की कमी से पढ़ाई न छोड़ें लड़कियां; सुप्रीम कोर्ट की क... चुनाव की मांग को लेकर सर्बिया में विशाल रैली Delhi Metro Monday: दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने फिर किया मेट्रो और बस से सफर; सचिवालय पहुंचकर की ख...

इस्पात उद्योग में प्राइस फिक्सिंग का खेल

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की गोपनीय जांच में खुलासा

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः भारतीय कॉरपोरेट जगत में एक बड़े भूचाल के रूप में, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की एक गोपनीय जांच ने देश की दिग्गज इस्पात कंपनियों के बीच एक गुप्त साठगांठ का पर्दाफाश किया है। इस जांच के केंद्र में टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील और सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी सेल सहित कुल 28 प्रमुख कंपनियां शामिल हैं।

6 अक्टूबर को जारी सीसीआई के आदेश के अनुसार, इन कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने बाजार में प्रतिस्पर्धा को खत्म करने के लिए आपस में मिलकर इस्पात की कीमतें तय की थीं। यह कथित मिलीभगत 2015 से 2023 के बीच के लंबे समय तक चली। कंपनियों ने कथित तौर पर बाजार में आपूर्ति को जानबूझकर सीमित किया, ताकि मांग बढ़ने पर कीमतों को कृत्रिम रूप से बढ़ाया जा सके।

इस जांच की नींव 2021 में पड़ी थी, जब बिल्डरों के एक समूह ने सामूहिक रूप से शिकायत दर्ज कराई थी कि इस्पात की कीमतों में असामान्य वृद्धि के पीछे कंपनियों का गुप्त गठबंधन है। इस जांच की सबसे गंभीर बात यह है कि इसमें केवल कंपनियों को ही नहीं, बल्कि उनके शीर्ष नेतृत्व को भी सीधे तौर पर उत्तरदायी ठहराया गया है। सीसीआई ने 56 शीर्ष अधिकारियों की पहचान की है, जिनमें जेएसडब्ल्यू के प्रबंध निदेशक सज्जन जिंदल और टाटा स्टील के सीईओ टी.वी. नरेंद्रन जैसे प्रभावशाली नाम शामिल हैं।

जुलाई 2025 के एक आंतरिक दस्तावेज से यह खुलासा हुआ है कि जांचकर्ताओं के हाथ बेहद पुख्ता सबूत लगे हैं। क्षेत्रीय उद्योग समूहों के बीच साझा किए गए व्हाट्सएप संदेशों से यह स्पष्ट हुआ है कि कंपनियां कब और कैसे उत्पादन में कटौती करनी है और कीमतों को किस स्तर पर स्थिर रखना है, इस पर नियमित चर्चा करती थीं। ये डिजिटल साक्ष्य इस मामले में कंपनियों की मुश्किलों को काफी बढ़ा सकते हैं।

प्रतिस्पर्धा कानूनों के उल्लंघन के मामले में सीसीआई के पास कड़े दंड देने का अधिकार है। नियमों के अनुसार कंपनियों पर उनके कुल लाभ का तीन गुना तक जुर्माना लगाया जा सकता है। कंपनियों के वार्षिक टर्नओवर का 10 प्रतिशत तक जुर्माना वसूला जा सकता है। चूँकि ये सभी कंपनियां अरबों रुपये का कारोबार करती हैं, इसलिए जुर्माने की राशि भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी राशि हो सकती है।

यह जांच न केवल इस्पात उद्योग के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि यह भारत के रियल एस्टेट और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों को भी प्रभावित करती है, जहाँ कच्चा माल महंगा होने से लागत बढ़ गई थी। अब यह देखना होगा कि सीसीआई के अंतिम फैसले के बाद ये कंपनियां न्यायिक स्तर पर क्या रुख अपनाती हैं।