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अमेरिका ने बार बार की चीनी हरकतों को बेकार बताया

ताइवान जलडमरूमध्य में तनाव पर प्रतिक्रिया

वाशिंगटनः ताइवान के चारों ओर चीन के हालिया सैन्य अभ्यासों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता पैदा कर दी है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने चीन से संयम बरतने का आह्वान किया है और ऐसी कार्रवाइयों से बचने की सलाह दी है जो क्षेत्रीय तनाव को अनावश्यक रूप से बढ़ाती हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने एक कड़े बयान में कहा कि चीन की युद्धोन्मादी भाषा और सैन्य अभ्यास, जिसमें द्वीप की घेराबंदी का अभ्यास किया गया, अस्थिरता का एक बड़ा स्रोत हैं।

विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता का समर्थन करता है और बलपूर्वक यथास्थिति को बदलने के किसी भी प्रयास का विरोध करता है। चीन ने हाल ही में ताइवान को घेरने के लिए मिसाइलें दागीं और लड़ाकू विमानों व नौसैनिक जहाजों को तैनात किया। बीजिंग ताइवान को अपना अभिन्न अंग मानता है और उसने भविष्य में इसे अपने नियंत्रण में लाने का संकल्प लिया है।

ताइवान के राष्ट्रपति विलियम लाई चिंग-ते ने चीन की इस आक्रामकता की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि उनका रुख स्पष्ट है: राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा करना और रक्षा व्यवस्था को मजबूत करना। उन्होंने सैन्य खर्च में 40 अरब डॉलर की वृद्धि का प्रस्ताव रखा है, हालांकि यह वर्तमान में ताइवानी विधायिका में विपक्ष के बहुमत के कारण अटका हुआ है। राष्ट्रपति लाई ने चेतावनी दी कि आने वाला वर्ष, 2026, ताइवान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने कहा, हमें सबसे बुरे के लिए योजना बनानी चाहिए, लेकिन सबसे अच्छे की आशा करनी चाहिए।

दूसरी ओर, अमेरिकी राजनीति में इस मुद्दे पर अलग-अलग स्वर सुनाई दे रहे हैं। दशकों से अमेरिका की नीति सामरिक अस्पष्टता की रही है। हाल ही में अमेरिका ने ताइवान के लिए 11 अरब डॉलर के हथियार पैकेज को मंजूरी दी है। हालांकि, नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि उन्हें नहीं लगता कि चीन निकट भविष्य में आक्रमण की योजना बना रहा है। ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपने संबंधों का हवाला देते हुए कहा कि नौसैनिक अभ्यास पिछले 20 वर्षों से हो रहे हैं और इसे अलग चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।