Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Jharkhand Crime: सीआईडी का बड़ा एक्शन! बोकारो एसपी ऑफिस के एएसआई गिरफ्तार, 1.11 करोड़ की अवैध निकासी... Crime & Safety: रांची के मेडिकल स्टोर में मौत बनकर घुसी कार, दुकान के अंदर मची अफरा-तफरी; पूरी घटना ... Women's Reservation: 'आज करो-अभी करो'—महिला आरक्षण को लेकर कांग्रेस का बड़ा आंदोलन, देश भर से पीएम क... Deoghar News: उद्घाटन के इंतजार में दम तोड़ रहा देवघर का 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर', खुद ही होने लगा रो... Jharkhand Weather Alert: झारखंड में मौसम ने ली करवट; मई के पहले हफ्ते तक मेघ गर्जन और बारिश का अलर्ट... Vineet Tiwari Murder Case: विनीत तिवारी हत्याकांड में बड़ी कार्रवाई; SIT का गठन, कई ठिकानों पर पुलिस... Palamu Railway Wagon Factory: पलामू में खुलेगी रेलवे वैगन फैक्ट्री! रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सां... Jharkhand Board Result: आईसीएसई-आईएससी नतीजों में झारखंड का जलवा, 99.2% पास प्रतिशत के साथ बेटियों क... Land Dispute: जमीन सीमांकन के दौरान अंचल टीम पर हमला; महिलाओं ने कर्मियों को पीटा, काम रोककर भागे अध... Ramgarh Cyber Crime: रामगढ़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई; साइबर गिरोह के 4 सदस्य गिरफ्तार, फर्जी खातों से ...

भारत के विरुद्ध साजिश का असली खिलाड़ी कौन

अब यह कहने में जरा भी संकोच नहीं है कि वर्तमान में बांग्लादेश के भीतर कुछ चरमपंथी तत्व बहुत सक्रिय हो चुके हैं और वे निरंतर भारत के विरुद्ध घृणा की आग भड़काने का काम कर रहे हैं। स्थिति इस कदर विकट हो चुकी है कि ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग और वहां के राजनयिकों पर सुरक्षा का खतरा मंडराने लगा है। चरमपंथियों की बढ़ती धमकियों और असुरक्षित वातावरण के कारण वहां के भारतीय वीजा आवेदन केंद्रों को अस्थायी रूप से बंद करने जैसा कड़ा कदम उठाना पड़ा है।

इसके बावजूद, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस स्थिति को सुधारने के बजाय उसे और अधिक बिगाड़ने पर तुले हुए प्रतीत होते हैं। मोहम्मद यूनुस ने आगामी फरवरी माह में चुनाव कराने की घोषणा की थी, लेकिन हाल ही में शेख हसीना के विरुद्ध हुए आंदोलन का एक प्रमुख चेहरा रहे शरीफ उस्मान हादी की नकाबपोश हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी।

अब इस हत्याकांड को लेकर एक नया और भ्रामक नैरेटिव गढ़ा जा रहा है। इसी बीच, एक हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की अत्यंत बर्बरतापूर्ण तरीके से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। क्रूरता की हद तो तब पार हो गई जब उसकी लाश को पेड़ से लटकाकर आग के हवाले कर दिया गया। इन तमाम जघन्य अपराधों के बावजूद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।

इतना ही नहीं, कट्टरपंथ के खिलाफ आवाज उठाने वाले दो प्रमुख समाचार पत्रों – प्रथम आलो और द डेली स्टार के कार्यालयों को आग लगा दी गई। इन संस्थानों को भारत समर्थक करार दिया गया है, और सरकार की चुप्पी इस बात की ओर इशारा करती है कि इन घटनाओं के पीछे सत्ता का मौन समर्थन प्राप्त है।

वास्तव में, बांग्लादेशी कट्टरपंथी चाहते हैं कि भारत विरोधी आग को इतना हवा दी जाए कि वहां भारत की बात सुनने वाला कोई न बचे। शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोकने की पूरी कोशिश की जा रही है। जिस बांग्लादेश को भारत ने पाकिस्तान के चंगुल से छुड़ाया और एक नए राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में लाया, आज वहीं से भारत को खंडित करने के खुलेआम नारे लग रहे हैं।

सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर जनरल अब्दुल्लाहिल अमान आजमी बार-बार जहर उगल रहे हैं कि बांग्लादेश में शांति तभी आएगी जब भारत के टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे। नेशनल सिटीजन पार्टी के मुख्य आयोजक हसनात अब्दुल्ला ने तो यहाँ तक दावा कर दिया है कि बांग्लादेश भारत की सेवन सिस्टर्स (अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा) को भारत से अलग कर देगा।

पहलगाम हमले के बाद सेवानिवृत्त मेजर जनरल फजलुर रहमान ने भी भड़काऊ बयान दिया कि यदि भारत पाकिस्तान पर हमला करता है, तो बांग्लादेश को चीन और पाकिस्तान के साथ मिलकर इन सात राज्यों पर कब्जा कर लेना चाहिए। क्या मोहम्मद यूनुस इन बयानों पर चुप हैं? नहीं, वे चुप नहीं हैं, बल्कि वे भी इस आग को हवा देने वालों में शामिल हैं।

अपनी चीन यात्रा के दौरान उन्होंने हास्यास्पद दावा किया था कि बांग्लादेश भारत के इन सात राज्यों का संरक्षक है क्योंकि वे चारों ओर से जमीन से घिरे हैं, और चीन को बांग्लादेश के माध्यम से अपना व्यापार बढ़ाना चाहिए। यह मोहम्मद यूनुस की एक सोची-समझी रणनीति है – भारत के विरुद्ध इतना जहर भर देना कि चुनाव में केवल कट्टरपंथी ताकतें ही जीतें और सत्ता अंततः पाकिस्तानी हैंडलर्स (सेना, आईएसआई और आतंकी संगठन) के पास चली जाए।

कट्टरपंथियों को डर है कि यदि निष्पक्ष चुनाव हुए तो शेख हसीना के समर्थक फिर से सत्ता में आ सकते हैं। अपने कार्यकाल के दौरान शेख हसीना ने इस्लामी चरमपंथियों पर लगाम कसी थी और पाकिस्तान को पैर पसारने का मौका नहीं दिया था। ढाका में कट्टरपंथियों ने भारतीय उच्चायोग की ओर मार्च निकाला, जिसका उद्देश्य तोड़फोड़ करना था, ठीक उसी तरह जैसे 1979 में पाकिस्तान में अमेरिकी दूतावास को जलाया गया था। आईएसआई इसी एजेंडे पर काम कर रही है।

लेकिन बांग्लादेश की वर्तमान सत्ता को यह समझ लेना चाहिए कि भारत कोई कमजोर देश नहीं है। वह आतंकियों और उनके आकाओं से निपटना अच्छी तरह जानता है। चाहे वे अमेरिका के पीछे छिपें, चीन की गोद में बैठें या पाकिस्तान से हाथ मिलाएं—भारत अपने चुने हुए समय पर उचित जवाब देना जानता है। उनके हित में यही है कि वे अपनी मर्यादा में रहें। इस बात को याद रखना होगा कि पड़ोसी के घर में लगी आग हम तक नहीं आयेगी, यह सोचना एक मुर्खता है। समय समय पर दिये बयान और जरूरत के मौके पर चुप्पी साधकर मोहम्मद युनूस ने यह साफ कर दिया है कि उनके चेहरे के पीछे दरअसल कौन सी ताकतें हैं।