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प्रदूषण से बड़ी राहत: दिल्ली में 5 साल बाद मिली सबसे साफ हवा, लेकिन क्या जनवरी में फिर लौटेगा ‘स्मॉग’?

दिल्ली-एनसीआर की हवा पिछले कई दिनों से लगातार खराब है, अभी भी यह जारी है. वायु प्रदूषण की वजह से लोगों को कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. अभी भी हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है. लेकिन आंकड़ों की नजर में दिल्ली की हवा पिछले 5 सालों में इस बार सबसे साफ रही. शहर ने साल 2020 के बाद से इस बार सबसे साफ हवा में सांस ली. हालांकि राहत की जगह टेंशन वाली बात यह है कि दिल्ली के लोगों ने जिन पार्टिकुलेट मैटर (Particulate Matter, PM) में सांस ली, उसकी मात्रा राष्ट्रीय स्तर या फिर WHO के सुरक्षा मानकों से कहीं बहुत ज्यादा थी.

साल 2025 में 29 दिसंबर तक औसतन PM2.5 की मात्रा 98 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर थी. यह 40 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर के सालाना राष्ट्रीय स्तर के स्टैंडर्ड से करीब 2.45 गुना और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 5 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर के सुरक्षा दिशा-निर्देश की तुलना में 19.6 गुना अधिक है.

WHO के गाइडलाइन से 13 गुना अधिक

अंग्रेजी अखबार TOI के अनुसार, इसी तरह, 2025 में, 29 दिसंबर तक, PM10 की मात्रा सालाना 200 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर थी. यह 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर के सालाना राष्ट्रीय औसत से 3.3 गुना ज्यादा थी और WHO की 15 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर की गाइडलाइन से 13.33 गुना ज्यादा रहा था.

हालांकि दिल्ली की हवा के स्तर में पिछले 5 सालों में मामूली सुधार के पीछे कई तरह के फैक्टर भी शामिल हैं. अलग-अलग तरह के कई फैक्टर्स की वजह से दिल्ली को थोड़ी राहत मिली. इस साल मई से अक्टूबर तक औसत से कहीं ज्यादा बारिश, जल्दी दीवाली आने, पराली के मामले कम होने से कम धुओं का निकलना और ज्यादातर दिनों में तेज हवाएं चलीं.

सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों, जिसका अध्ययन थिंक टैंक EnviroCatalysts ने किया है, पिछले साल 2024 में सालाना औसत PM2.5 लेवल 104 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर, 2023 में 101, 2022 में 99, 2021 में 107, और 2020 में 98 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था. इसके अनुसार, दिल्ली में 2023 और 2024 में सालाना औसत PM2.5 लेवल में बढ़ोतरी देखी गई, लेकिन इस साल इसमें गिरावट देखी गई.

PM2.5 मामले में दिल्ली के 3 सबसे प्रदूषित शहर

PM2.5 लेवल के मामले में, जहांगीरपुरी (130 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर), वजीरपुर (124), और आनंद विहार (121) इस साल की 3 सबसे ज्यादा प्रदूषित जगहें थीं. सालाना PM10 लेवल 2024 में 212 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा तो 2023 में 207 जबकि 2022 में 213 रहा था. साल 2022 में 215 और 2023 में 190 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया.

EnviroCatalysts के संस्थापक और अध्ययनकर्ता सुनील दहिया ने कहा कि लगातार बढ़ते प्रदूषण स्तर, जो PM10 के लिए राष्ट्रीय मानकों से दोगुने से कहीं ज्यादा और PM2.5 के लिए करीब 2.5 गुना हैं, यह दिखाते हैं कि पूरे एयरशेड में एमिशन लोड लंबे समय से क्षेत्र की सह सकने की क्षमता से कहीं अधिक हो गया है. वह आगे कहते हैं, “पिछले 5 से 6 सालों में इन स्तर में ठहराव, बढ़ती आबादी, खपत और लगातार औद्योगिक गतिविधियों के बावजूद, यह बताता है कि प्रति यूनिट उत्पादन में एमिशन की तीव्रता में सुधार हुआ होगा, लेकिन गतिविधि में कुल बढ़ोतरी ने उन फायदों को जल्दी खत्म कर दिया.