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शराबियों को ठगने का नया तरीका पकड़ाया

नाप का पैमाना ही बदल जाते हैं दो पैग के बाद

  • रसिक मजाक में ऐसा कहते थे

  • जांच में यह आरोप प्रमाणित हुआ

  • बार मालिक को सीधा आर्थिक लाभ

राष्ट्रीय खबर

तिरुअनंतपुरमः केरल के कन्नूर जिले में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने बार जाने वाले ग्राहकों के उस पुराने मजाक को हकीकत में बदल दिया कि दो राउंड के बाद नशा बढ़ते ही पैग का साइज छोटा हो जाता है। सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो द्वारा चलाए गए ऑपरेशन बारकोड के तहत पझयंगडी स्थित प्रतीक्षा बार में की गई छापेमारी ने एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है।

आमतौर पर बार में शराब मापने के लिए जिगर नामक धातु के कप का उपयोग किया जाता है। मानक नियमों के अनुसार, इसके एक तरफ 60 मिलीलीटर (बड़ा पैग) और दूसरी तरफ 30 मिलीलीटर (छोटा पैग) मापने की क्षमता होती है। लेकिन सतर्कता विभाग के अधिकारियों को इस बार के काउंटर से एक ऐसा गैर-मानक जिगर मिला, जिसमें माप केवल 48 मिलीलीटर और 24 मिलीलीटर थी।

विजिलेंस के डिप्टी एसपी बाबू पेरिंगेथ के अनुसार, उन्हें गुप्त सूचना मिली थी कि यह बार ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी कर रहा है। आरोप है कि जब ग्राहक शुरुआती दो-तीन पैग पी लेते थे और थोड़े नशे में होते थे, तब बार कर्मचारी मानक कप को हटाकर इस छोटे कप का इस्तेमाल शुरू कर देते थे। इससे ग्राहकों को प्रति पैग 12 मिलीलीटर कम शराब मिलती थी, जिसका सीधा आर्थिक लाभ बार मालिक को होता था।

दूसरी ओर, बार के जनरल मैनेजर जेफ्री अलॉयसियस मॉरिसन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका दावा है कि विजिलेंस अधिकारियों ने एक पुरानी दराज में पड़े धूल भरे और मकड़ी के जाले लगे कप को जबरन निकाला ताकि वे अपना मासिक टारगेट पूरा कर सकें। उन्होंने तर्क दिया कि पास में ही एक सरकारी बेवको आउटलेट होने के कारण वे ग्राहकों को लुभाने के लिए मुफ्त स्नैक्स और भोजन देते हैं, ऐसे में वे ग्राहकों को धोखा देकर अपना व्यवसाय खराब नहीं करेंगे।

इस मामले में कानूनी माप विज्ञान विभाग को तुरंत मौके पर बुलाया गया, जिसने गैर-मानक उपकरण रखने के लिए बार पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया। इसके साथ ही, ऑपरेशन बारकोड के तहत अधिकारियों ने शराब की बोतलों पर लगे क्यू आर कोड की भी जांच की।

केरल स्टेट बेवरेजेस कॉरपोरेशन ने अब हर बोतल के लिए क्यूआर कोड आधारित ट्रैकिंग सिस्टम अनिवार्य कर दिया है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि बोतल किस डिपो से निकली और किस बार के लिए आवंटित थी। हालांकि, कुछ बोतलों के कोड स्कैन करने पर डेटा में विसंगतियां पाई गईं (जैसे रम की बोतल पर बीयर का डेटा), जिसे फिलहाल सिस्टम की तकनीकी खराबी माना जा रहा है। यह कार्रवाई राज्य के अन्य बार मालिकों के लिए एक कड़ी चेतावनी है कि वे माप और गुणवत्ता के मानकों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता न करें।