Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
West Bengal Update: बंगाल के युवाओं और किसानों की चांदी! ममता सरकार देगी हर महीने भत्ता, जानें कैसे ... Jaipur Mystery: जयपुर में गायब हुए 2 जापानी टूरिस्ट; रेस्टोरेंट से हुए लापता और सीधे पहुँच गए जापान,... Rail Safety Crisis: ट्रेन में यात्री भगवान भरोसे! वेंडरों ने बेरहमी से पीट-पीटकर यात्री को किया अधमर... Assam Voter List: असम की फाइनल वोटर लिस्ट जारी; ड्राफ्ट सूची से 2.43 लाख नाम बाहर, अब 2.49 करोड़ मतद... Cyber Fraud Update: साइबर ठगों की अब खैर नहीं! CBI और I4C का चलेगा 'हंटर', अमित शाह ने दी देश के दुश... Delhi Govt Scheme: दिल्ली की बेटियों के लिए खुशखबरी! 'लखपति बिटिया' योजना का आगाज, अब लाडली की जगह म... Exam Special: ड्रोन कैमरे का कमाल! 12वीं के बोर्ड पेपर में दीवार फांदकर नकल कराते दिखे अभिभावक, कैमर... Peeragarhi Mystery: काला जादू या सोची-समझी साजिश? पीरागढ़ी केस में 'तांत्रिक' कनेक्शन से हड़कंप, कार... Budget 2026: लोकसभा में बजट पर बहस का आगाज़! राहुल और नरवणे की किताब पर विवाद के बीच विपक्ष ने सरकार... Delhi Crime: दिल्ली में खेल-खेल में मची चीख-पुकार! 18 साल के बेटे से गलती से चली गोली, मां की मौके प...

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर चला सुप्रीम कोर्ट का हथौड़ा

कुलदीप सेंगर की जमानत पर रोक लगायी

  • लोक सेवक के मुद्दा का बड़ा विवाद

  • पॉक्सो कानून का सवाल उठ गया

  • सीबीआई के तर्क और पीड़िता का पक्ष

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें उन्नाव बलात्कार मामले के दोषी और उत्तर प्रदेश के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित कर उसे जमानत दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.जी. मसीह की पीठ ने इस मामले में सीबीआई और अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर अपील पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।

इस मामले में सबसे बड़ा कानूनी विवाद इस बात पर है कि क्या एक विधायक को पॉक्सो अधिनियम के तहत लोक सेवक माना जाना चाहिए या नहीं। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सेंगर को लोक सेवक की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, जिसके आधार पर उसकी सजा की गंभीरता को कम आँकते हुए उसे जमानत दी गई थी।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर गंभीर असहमति जताई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी की, यदि इस व्याख्या को स्वीकार कर लिया जाए, तो एक सिपाही या पटवारी तो लोक सेवक माना जाएगा, लेकिन विधायक और सांसद इससे मुक्त हो जाएंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पॉक्सो एक्ट के तहत लोक सेवक की परिभाषा और उसकी प्रासंगिकता पर गहन कानूनी विचार की आवश्यकता है।

सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराध तब और गंभीर हो जाता है जब अपराधी बच्चे पर प्रभुत्व रखने वाली स्थिति में हो। उन्होंने तर्क दिया कि सेंगर एक शक्तिशाली विधायक था और उसने अपने पद का दुरुपयोग किया। मेहता ने कोर्ट को याद दिलाया, हम उस 15 वर्षीय बच्ची के प्रति जवाबदेह हैं जिसके साथ यह कृत्य हुआ। साथ ही यह भी बताया गया कि सेंगर को पीड़िता के पिता की हत्या के मामले (आईपीसी की धारा 304 पार्ट-2) में भी 10 साल की सजा मिली हुई है और वह फिलहाल जेल में ही है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि सेंगर पहले से ही दूसरे मामले में जेल में है और इस मामले में कानून के सारभूत प्रश्न शामिल हैं, इसलिए हाईकोर्ट के आदेश को लागू करना उचित नहीं होगा। अदालत ने सेंगर को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब माँगा है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पीड़िता को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान की जाएगी और उसे अलग से विशेष अनुमति याचिका दायर करने का पूरा अधिकार है।

कुलदीप सिंह सेंगर को 2019 में एक नाबालिग लड़की से बलात्कार के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इस मामले ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था क्योंकि पीड़िता ने तत्कालीन विधायक और उसके सहयोगियों पर लगातार डराने-धमकाने और परिवार को निशाना बनाने के गंभीर आरोप लगाए थे।