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घूसखोरी के मामले में विवादों में आ गये प्रसार भारती के पूर्व प्रमुख

कांग्रेस का आरोप 112 करोड़ का किकबैक मिला है

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी ने एक मीडिया रिपोर्ट और आयकर निदेशालय (जांच) के 254 पन्नों के गोपनीय दस्तावेजों का हवाला देते हुए पूर्व प्रसार भारती प्रमुख नवनीत कुमार सहगल पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का दावा है कि श्री सहगल उस विशाल ‘किकबैक नेटवर्क’ के सबसे बड़े लाभार्थी थे, जिसने साल 2019-20 से 2021-22 के बीच उत्तर प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से लगभग 112 करोड़ रुपये का गबन किया। कांग्रेस ने इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रहस्यमयी चुप्पी पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।

गौरतलब है कि 1988 बैच के आईएएस अधिकारी रहे नवनीत कुमार सहगल ने अपना कार्यकाल एक वर्ष शेष रहते ही 2 दिसंबर को प्रसार भारती के अध्यक्ष पद से अचानक इस्तीफा दे दिया था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आयकर विभाग के दस्तावेजों के अनुसार, सहगल इस भ्रष्टाचार नेटवर्क के केंद्र में थे। खेड़ा ने आरोप लगाया कि गंभीर सबूतों के बावजूद उनके खिलाफ कोई आपराधिक जांच या विभागीय कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने बताया कि आयकर विभाग ने सहगल द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को स्वीकार कर मामला बंद कर दिया और इसके तुरंत बाद मार्च 2024 में उन्हें प्रसार भारती का प्रतिष्ठित पद सौंप दिया गया।

कांग्रेस ने सहगल के इस्तीफे के पीछे की कड़ियों को जोड़ते हुए दावा किया कि उनकी विदाई का संबंध सट्टेबाजी ऐप विवाद और प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारी हिरेन जोशी के साथ उनके पुराने जुड़ाव से हो सकता है। खेड़ा ने यह भी दावा किया कि चर्चाएं हैं कि सहगल जल्द ही पीएमओ में हिरेन जोशी की जगह ले सकते हैं। उन्होंने प्रश्न किया कि यदि सट्टेबाजी घोटालों और भ्रष्टाचार से जुड़े नाम पीएमओ जैसे संवेदनशील स्थान पर तैनात हो सकते हैं, तो प्रधानमंत्री के जीरो टॉलरेंस के दावे का क्या होगा?

इसके अलावा, कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी सहगल को संरक्षण देने का आरोप लगाया। पार्टी का कहना है कि राज्य सरकार ने आयकर विभाग के निष्कर्षों को नजरअंदाज किया। खेड़ा ने इसे भ्रष्टाचार की व्हाइटवॉशिंग करार देते हुए कहा कि ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा का नारा देने वाली डबल-इंजन सरकार ने जानबूझकर कार्रवाई नहीं की क्योंकि लूट का पैसा उन योजनाओं से निकाला गया था जो गरीब कारीगरों और श्रमिकों के लिए थीं। कांग्रेस ने मांग की है कि इस पूरे नेटवर्क की स्वतंत्र जांच हो ताकि लूट की सच्चाई सामने आ सके।