Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
पिछले चार दशकों से डाक्टर और मरीज दोनों गलतफहमी में थे घने जंगलों के निवासियों का अपनी गुप्त संवाद तंत्र कायम है, देखें वीडियो Namo Bharat News: दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर पर नमो भारत की 10 अतिरिक्त ट्रिप्स; अब और भी आसान होगा सफर असम में समान नागरिक संहिता विधेयक पास Border Security News: घुसपैठ और तस्करी पर नकेल; अमित शाह ने जिला अधिकारियों को सौंपी अहम जिम्मेदारी,... Modi Govt 12 Years: मोदी सरकार के केंद्र में 12 साल पूरे; भाजपा मनाएगी भव्य जश्न, 2047 का रोडमैप होग... अगले चुनाव में 33 फीसद सीट महिलाओं कोः  नारा लोकेश Ayushman Bharat Delhi: दिल्ली में 7.72 लाख से ज्यादा आयुष्मान कार्ड जारी; 10 लाख तक का मिल रहा कैशले... वामपंथी समर्थकों ने अफसरों पर हमला कर दिया Annapurna Bhandar Update: लक्ष्मी भंडार में गड़बड़ियों का दावा; बंगाल सरकार ने शुरू की नई स्कीम, जून स...

“घुसकर मारना अब मजबूरी नहीं, नीति है”: ऑपरेशन सिंदूर के साथ 2025 में भारत ने बदला युद्ध का व्याकरण

साल 2025 को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा इतिहास में एक निर्णायक मोड़ के रूप में याद किया जाएगा. इस वर्ष भारत ने स्पष्ट कर दिया कि उसकी सुरक्षा नीति अब केवल प्रतिक्रियात्मक या रक्षात्मक नहीं रही, बल्कि आक्रामक प्रतिरोध और निर्णायक कार्रवाई पर आधारित है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने यह संदेश दिया कि भारतीय नागरिकों पर होने वाले किसी भी आतंकी हमले का जवाब अब केवल संयम तक सीमित नहीं होगा.

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बदले हुए दृष्टिकोण को आतंकवाद के खिलाफ भारत के ‘Five New Normal’ के रूप में परिभाषित किया. इन नए मानकों के तहत भारत ने यह साफ किया कि वह खतरे की पहचान पहले करेगा, समय पर निर्णय लेगा और आवश्यकता पड़ने पर तेज, सटीक और प्रभावी कार्रवाई से अपने नागरिकों और सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा. ये सिद्धांत हैं-

  1. आतंकी हमलों का दृढ़ जवाब (किसी भी हमले का निर्णायक जवाब दिया जाएगा).
  2. परमाणु ब्लैकमेल के लिए कोई सहिष्णुता नहीं (परमाणु खतरे भारत को आतंकवादी ठिकानों पर हमला करने से नहीं रोकेंगे).
  3. आतंकवादियों और उनके प्रायोजकों के बीच कोई अंतर नहीं (दोनों को समान रूप से जवाबदेह ठहराया जाएगा).
  4. किसी भी बातचीत में आतंकवाद पहले (संलग्नता, यदि होती है, तो केवल आतंकवाद से संबंधित मुद्दों पर केंद्रित होगी).
  5. संप्रभुता पर शून्य समझौता (आतंक और वार्ता एक साथ नहीं चल सकते, आतंक और व्यापार एक साथ नहीं चल सकते) वैश्विक अनिश्चितता के बीच, भारत आत्मविश्वास और तैयारी के साथ खड़ा रहा और एक स्पष्ट संदेश दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता और संप्रभुता की हर कीमत पर रक्षा की जाएगी.

ऑपरेशन सिंदूर: आतंकवाद को कड़ा जवाब

7 मई 2025 को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जो कि हाल के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण सैन्य कार्रवाइयों में से एक है. पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किए गए इस ऑपरेशन ने भारत की सुरक्षा स्थिति में एक नया सामान्य स्थापित किया कि अगर भारत के नागरिकों को निशाना बनाया जाता है तो वह दुश्मन के इलाके में अंदर तक आतंक के केंद्र पर हमला करेगा.

यह पांच दशकों में पाकिस्तानी क्षेत्र के भीतर भारत की सबसे महत्वपूर्ण सैन्य कार्रवाई है. यह भारतीय सेना का अब तक का सबसे बड़ा और सबसे गहरा हमला है. पहली बार भारत ने परमाणु हथियार संपन्न दुश्मन देश के अंदर कई लक्ष्यों पर सटीक हमले किए, जो बेजोड़ रणनीतिक आत्मविश्वास का प्रदर्शन करता है.

1971 के बाद पहली बार भारत ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के दिल में हमला किया और लगभग 100 आतंकवादियों को मार गिराया. भारत ने 10 मई को 11 पाकिस्तानी एयरबेस पर सटीकता के साथ हमला किया और भारत की कोई भी मिसाइल पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम से इंटरसेप्ट नहीं हो पाई. ऑपरेशन सिंदूर ने एक नया सिद्धांत मजबूती से स्थापित किया कि अगर भारतीय नागरिकों पर हमला होता है तो भारत दुश्मन के इलाके में भी निर्णायक रूप से तेजी से और अपनी शर्तों पर जवाब देगा. इस सोची-समझी और दमदार प्रतिक्रिया ने क्षेत्रीय सुरक्षा डायनामिक्स को नया रूप दिया है और रोकथाम को मजबूत किया है.

दुनिया भर के जानकारों को इस बात ने चौंका दिया कि यह ऑपरेशन लगभग पूरी तरह से मेड-इन-इंडिया तकनीक से किया गया था. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने मिलकर सटीक हमले किए, जिसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ने खास ध्यान खींचा. भारत के 4.5-जेनरेशन के राफेल जेट ने बेजोड़ सटीकता के साथ हमले का नेतृत्व किया, जबकि कामिकेज एवं लोइटरिंग ड्रोन ने कई जगहों पर रियल-टाइम निगरानी और चलते-फिरते लक्ष्यों सहित सटीक हमलों में मदद की.

सेना ने पक्के इरादों से दिखाई काबिलियत

पीएम मोदी नेतृत्व में भारत का डिफेंस बदलाव 2025 में एक नए मुकाम पर पहुंचा. मेक इन इंडिया से चला डिफेंस प्रोडक्शन, 2014 में 40,000 करोड़ रुपए से बढ़कर आज 1.54 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है, जो भारत के एक भरोसेमंद ग्लोबल डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर उभरने को दिखाता है.

डिफेंस बजट 2013-14 में 2.53 लाख करोड़ से बढ़कर 2025-26 में 6.81 लाख करोड़ रुपए हो गया, जो मॉडर्नाइजेशन, तैयारी और इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार इन्वेस्टमेंट को दिखाता है. भारत अब अमेरिका, फ्रांस और आर्मेनिया समेत 100 से ज्यादा देशों को डिफेंस इक्विपमेंट एक्सपोर्ट करता है, जिसमें डिफेंस PSUs प्रोडक्शन का लगभग 77% हिस्सा देते हैं और प्राइवेट सेक्टर का हिस्सा 23% है.

तीनों सेनाओं को मिली मजबूती

2025 में भारत के डिफेंस मॉडर्नाइजेशन में बहुत तेजी आई, इस साल 4.30 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के एक्विजिशन प्रपोजल को मंज़ूरी दी गई. इन फैसलों का स्केल और स्पीड, आर्मी, नेवी और एयर फोर्स में लड़ाई की तैयारी को तेजी से बढ़ाने पर सरकार के साफ फोकस को दिखाता है.

मार्च 2025 में, डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने 54,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के कैपिटल एक्विजिशन प्रपोजल को मंजूरी दी, जिसमें T-90 टैंकों के लिए पावरफुल 1,350 HP इंजन, देश में बने वरुणास्त्र टॉरपीडो और एडवांस्ड एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम शामिल हैं. उसी महीने एक ऐतिहासिक मील का पत्थर भी देखा गया, जब भारत ने अटैक हेलीकॉप्टरों की अपनी अब तक की सबसे बड़ी खरीद को मंजूरी दी, जो HAL से 156 लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टरों के लिए 62,000 करोड़ रुपए का सौदा था.

जुलाई 2025 में, डीएसी ने बख्तरबंद रिकवरी वाहन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली सहित लगभग 1.05 लाख करोड़ रुपए मूल्य के 10 पूंजी अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी. भारत ने अप्रैल 2025 में भारतीय नौसेना के लिए 26 डसॉल्ट राफेल-एम लड़ाकू जेट हासिल करने के लिए फ्रांस के साथ₹63,000 करोड़ रुपए (लगभग $7.5 बिलियन) का एक बड़ा सौदा किया. भारत ने इससे पहले 2016 में भारतीय वायु सेना के लिए 36 राफेल जेट खरीदे थे.

अगस्त 2025 में, डीएसी ने सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए 67,000 करोड़ रुपए मूल्य के प्रस्तावों को मंजूरी दी. यह निरंतर प्रयास अक्टूबर 2025 में लगभग 79,000 करोड़ रुपए मूल्य की अतिरिक्त खरीद मंजूरी के साथ परिणत हुआ.

स्वदेशी तकनीक से मिली नई ताकत

पहली 100 प्रतिशत स्वदेशी AK-203 असॉल्ट राइफल दिसंबर 2025 तक भारतीय सेना को प्रदान की जाएगी. इन राइफलों का उत्पादन अमेठी में किया गया था. जनवरी 2025 में, पहली बार एक विध्वंसक, फ्रिगेट और पनडुब्बी (INS सूरत, INS नीलगिरी और INS वाघशीर) को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था. अगस्त 2025 में, भारत ने 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ दो स्टील्थ फ्रिगेट, INS हिमगिरी और INS उदयगिरी को शामिल किया.

यह पहली बार है कि दो प्रतिष्ठित भारतीय शिपयार्ड के दो प्रमुख सतह लड़ाकू जहाजों को एक ही समय में शामिल किया जा रहा है. 2 भारत ने सितंबर 2025 में एक रेल आधारित लांचर से 2,000 किमी की रेंज के साथ परमाणु-सक्षम अग्नि प्राइम का परीक्षण किया. इस टेस्ट के साथ भारत रूस, अमेरिका और चीन जैसे कुछ चुनिंदा देशों की लीग में शामिल हो गया है – जो रेलकार-बेस्ड इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल, या ICBMs फायर करने में सक्षम हैं, या जिनके पास यह क्षमता थी.

भारत ने लखनऊ में ब्रह्मोस इंटीग्रेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी सेंटर में बनी ब्रह्मोस मिसाइलों के पहले बैच को हरी झंडी दिखाई, जो UP डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का एक अहम हिस्सा है.

सितंबर, 2025 में BSF ने टेकनपुर में भारत का पहला ड्रोन वॉरफेयर स्कूल खोला. हाल ही में दिसंबर 2025 में, DRDO ने टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TDF) स्कीम के तहत डेवलप की गई सात एडवांस्ड टेक्नोलॉजी आर्मी, नेवी और एयर फोर्स को सौंपी हैं.

साथ ही दिसंबर 2025 में, DRDO ने कंट्रोल्ड वेलोसिटी पर फाइटर एयरक्राफ्ट एस्केप सिस्टम का एक सफल हाई-स्पीड रॉकेट-स्लेज टेस्ट किया है. यह कॉम्प्लेक्स डायनामिक टेस्ट भारत को एडवांस्ड इन-हाउस एस्केप सिस्टम टेस्टिंग क्षमता वाले देशों के एलीट क्लब में लाता है.

डिफेंस प्रोक्योरमेंट मैनुअल में सुधार से निवेश में इजाफा

1 नवंबर 2025 से लागू किए गए डिफेंस प्रोक्योरमेंट मैनुअल 2025 इंडस्ट्री के अनुकूल सुधार किए गए. दो कॉरिडोर, उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPDIC) और तमिलनाडु डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (TNDIC) ने मिलकर अक्टूबर 2025 तक 289 MoU साइन करके 9,145 करोड़ से ज्यादा का निवेश आकर्षित किया है, जिससे 66,423 करोड़ रुपए के संभावित अवसर खुले हैं.

ओपन टेंडर में भाग लेने वाली प्राइवेट कंपनियों और MSMEs के लिए डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (DPSUs) से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) की जरूरत खत्म कर दी गई है. इसके अलावा, इनोवेशन और स्वदेशीकरण के जरिए आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना, इन्फॉर्मेशन और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी प्रोक्योरमेंट और कंसल्टेंसी और नॉन-कंसल्टेंसी सर्विसेज ये तीन नए चैप्टर शामिल किए गए हैं.