एक लंबे अनुसंधान के बाद ट्रामाडोल की खामी सामने आयी
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हृदय रोग का खतरा बढ़ाता है
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ओपियोइड संकट की वैश्विक स्थिति
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साढ़े छह हजार लोगों पर ट्रायल हुआ
राष्ट्रीय खबर
रांचीः हाल ही में हुए एक बड़े शोध विश्लेषण से यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि ट्रामाडोल, जो पुराने दर्द (क्रोनिक पेन) के लिए दी जाने वाली एक शक्तिशाली ओपियोइड दवा है, वास्तव में उतनी प्रभावी नहीं है जितना माना जाता था। बीएमजे एविडेंस बेस्ड मेडिसिन में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, ट्रामाडोल से मिलने वाली राहत बेहद मामूली है और यह चिकित्सकीय रूप से महत्वपूर्ण मानकों पर खरी नहीं उतरती। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि ट्रामाडोल के सेवन से हृदय रोग सहित कई गंभीर दुष्प्रभावों की संभावना बढ़ जाती है। अध्ययन के अनुसार, इस दवा के जोखिम इसके लाभों की तुलना में कहीं अधिक हैं, इसलिए इसका उपयोग कम से कम किया जाना चाहिए।
ट्रामाडोल एक डुअल एक्शन ओपियोइड है, जिसे डॉक्टर अक्सर गंभीर और पुराने दर्द के लिए लिखते हैं। पिछले कुछ वर्षों में इसकी मांग में भारी उछाल आया है, खासकर अमेरिका में यह सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाली दवाओं में से एक बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे यह गलत धारणा है कि ट्रामाडोल अन्य ओपियोइड्स की तुलना में कम नशीली और अधिक सुरक्षित है।
शोधकर्ताओं ने फरवरी 2025 तक प्रकाशित 19 क्लिनिकल ट्रायल का विश्लेषण किया, जिसमें 6,506 प्रतिभागी शामिल थे। इनमें ऑस्टियोआर्थराइटिस, पीठ दर्द, फाइब्रोमायल्गिया और कैंसर से संबंधित दर्द से पीड़ित मरीज शामिल थे।
परिणामों से पता चला कि ट्रामाडोल लेने वाले मरीजों में प्लेसबो (नकली दवा) लेने वालों की तुलना में नुकसान का जोखिम दोगुना था। सबसे चिंताजनक बात यह थी कि इसके सेवन से सीने में दर्द, कोरोनरी आर्टरी डिजीज और हार्ट फेल्योर जैसी हृदय संबंधी घटनाएं अधिक देखी गईं। इसके अलावा, मतली, चक्कर आना, कब्ज और नींद आना जैसे सामान्य दुष्प्रभाव भी बड़े पैमाने पर पाए गए।
अध्ययन में ओपियोइड के व्यापक खतरों पर भी प्रकाश डाला गया है। आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 6 करोड़ लोग ओपियोइड की लत से जूझ रहे हैं। साल 2019 में नशीली दवाओं के सेवन से हुई लगभग 6 लाख मौतों में से 80 फीसद ओपियोइड से जुड़ी थीं।
अमेरिका में ओपियोइड ओवरडोज से होने वाली मौतें 2019 में 49,860 से बढ़कर 2022 में 81,806 हो गई हैं। निष्कर्ष है कि ट्रामाडोल दर्द कम करने में बहुत कम प्रभावी है, जबकि इसके गंभीर दुष्प्रभाव होने की निश्चितता कहीं अधिक है। इसलिए, विशेषज्ञों की सलाह है कि दर्द प्रबंधन के लिए ओपियोइड्स का उपयोग यथासंभव कम किया जाना चाहिए।
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