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साल के अंत में रोबोटिक्स चिकित्सा में एक अच्छी खबर

सूक्ष्म रोबोटिक्स से भी होगा कैंसर का उपचार

  • आकार में बहुत ही छोटा है यह

  • यह स्वायत्त रुप से काम करता है

  • दूसरी कोशिकाओँ पर हमला नहीं करता

राष्ट्रीय खबर

रांचीः चिकित्सा विज्ञान ने हमेशा से ऐसी तकनीकों की खोज की है जो शरीर के स्वस्थ हिस्सों को नुकसान पहुँचाए बिना सीधे बीमारी की जड़ पर वार कर सकें। दिसंबर 2025 में वैज्ञानिकों ने इस दिशा में दो बड़ी सफलताएँ हासिल की हैं: प्रोग्रामेबल नैनो-रोबोट्स और कैंसर-रोधी बैक्टीरिया।

इंजीनियर्स और जीवविज्ञानी की एक संयुक्त टीम ने ऐसे रोबोट विकसित किए हैं जिनका आकार मात्र 200×300 माइक्रोमीटर (एक बाल की चौड़ाई से भी कम) है। ये रोबोट स्वायत्त हैं, जिसका अर्थ है कि इन्हें एक बार शरीर में डालने के बाद बाहर से नियंत्रित करने की आवश्यकता नहीं होती। ये रोबोट सेंसर से लैस हैं जो कैंसर कोशिकाओं की विशिष्ट रासायनिक पहचान को पहचान लेते हैं।

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इन रोबोट्स की सबसे बड़ी खूबी इनका लॉजिक गेट सिस्टम है। ये तभी सक्रिय होते हैं जब इन्हें लक्षित कोशिका में कैंसर के लक्षण मिलते हैं। इससे कीमोथेरेपी के उन दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है जो अक्सर स्वस्थ कोशिकाओं के नष्ट होने के कारण होते हैं। इसी महीने एक अन्य शोध में शोधकर्ताओं ने एक विशेष बैक्टीरिया, जिसे इविंगेला अमेरिकाना कहा जाता है, का उपयोग करके एक नई इम्यूनोथेरेपी विकसित की है।

चूहों पर किए गए परीक्षणों में इस बैक्टीरिया ने ट्रोजन हॉर्स की तरह काम किया। यह बैक्टीरिया ट्यूमर के अंदर घुसकर उसे भीतर से खोखला कर देता है और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सचेत कर देता है कि वह ट्यूमर पर हमला करे। परिणाम यह रहा कि कोलोरेक्टल कैंसर के ट्यूमर पूरी तरह से गायब हो गए।

इन दोनों तकनीकों का मेल कैंसर के उपचार को पूरी तरह बदल सकता है। भविष्य में, ये नन्हे रोबोट शरीर की नसों में तैरते हुए कैंसर की पहचान करेंगे और बैक्टीरिया आधारित थेरेपी उसे जड़ से खत्म कर देगी। यह न केवल इलाज को सटीक बनाएगा, बल्कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को एक सामान्य इंजेक्शन के जरिए ठीक करने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।

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