चुनाव परिणाम से दक्षिणपंथी उभार और ट्रंप का प्रभाव स्पष्ट
तेगुसिगाल्पा: मध्य अमेरिकी देश होंडुरास में हफ्तों तक चली तनावपूर्ण मतगणना और राजनीतिक गतिरोध के बाद आखिरकार कल देर रात आधिकारिक परिणामों की घोषणा कर दी गई। नास्री टीटो असफुरा, जो रूढ़िवादी नेशनल पार्टी के उम्मीदवार हैं, को देश का अगला राष्ट्रपति घोषित किया गया है।
चुनाव न्यायाधिकरण के अनुसार, असफुरा ने लगभग 40.27 प्रतिशत वोट हासिल किए, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी साल्वाडोर नसरल्ला (लिबरल पार्टी) को 39.53 फीसद वोट मिले। जीत का यह मामूली अंतर (1 प्रतिशत से भी कम) होंडुरास के इतिहास में सबसे कड़े मुकाबलों में से एक को दर्शाता है।
असफुरा की जीत को लैटिन अमेरिका में दाएं झुकाव की वापसी के रूप में देखा जा रहा है। उनकी उम्मीदवारी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का खुला समर्थन प्राप्त था, जिन्होंने चुनाव से कुछ दिन पहले उन्हें होंडुरास के लिए एकमात्र सही विकल्प बताया था। इस समर्थन ने न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ी, बल्कि विपक्षी दलों ने इसे चुनाव में बाहरी हस्तक्षेप भी करार दिया। विपक्षी नेता साल्वाडोर नसरल्ला ने चुनावी परिणामों को धोखाधड़ी बताते हुए स्वीकार करने से इनकार कर दिया है और अपने समर्थकों से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है।
राजधानी तेगुसिगाल्पा के पूर्व मेयर के रूप में असफुरा की छवि एक व्यावहारिक और काम करने वाले नेता की रही है। उन्होंने अपने विजय भाषण में वादा किया है कि वे देश में बुनियादी ढांचे के विकास, भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई और अमेरिका के साथ प्रवासन को रोकने के लिए ठोस नीतियां बनाएंगे।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी उन्हें बधाई दी है, जिससे यह संकेत मिलता है कि नई सरकार और वाशिंगटन के बीच संबंध काफी मजबूत रहने वाले हैं। हालांकि, असफुरा के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन लाखों नागरिकों का भरोसा जीतना होगा जो चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं। देश में राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना उनकी सरकार की पहली और सबसे कठिन परीक्षा होगी।