Breaking News in Hindi

ट्रिपल इंजन वाली महायुति का दबदबा बरकरार

महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनाव में एमवीए को करारा झटका

  • तीनों दलों का प्रदर्शन और बेहतर हुआ

  • विपक्ष के तीनों दल फिसड्डी रह गये

  • विपक्षी वोट बैंक भी खिसकते दिख रहे

राष्ट्रीय खबर

मुंबई: महाराष्ट्र के शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के हालिया परिणामों ने राज्य की राजनीतिक दिशा को एक नया मोड़ दे दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एक बार फिर राज्य की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरी है। इन चुनावों में भाजपा ने न केवल अपनी सीटों में इजाफा किया, बल्कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर महायुति गठबंधन के वर्चस्व को और अधिक प्रभावी ढंग से स्थापित कर दिया है।

अब तक घोषित 256 नगर परिषदों के परिणामों में भाजपा ने 133 परिषदों पर स्पष्ट जीत हासिल की है। महायुति के अन्य सहयोगियों का प्रदर्शन भी सराहनीय रहा, जहाँ शिंदे नीत शिवसेना ने 46 और अजीत पवार नीत राकांपा ने 35 नगर परिषदों पर अपना कब्जा जमाया। इसके विपरीत, विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी के लिए ये परिणाम किसी बड़े झटके से कम नहीं हैं। कांग्रेस को मात्र 35 परिषदें मिलीं, जबकि शरद पवार की राकांपा को आठ और उद्धव ठाकरे की शिवसेना को केवल छह सीटों पर ही संतोष करना पड़ा।

सीधे चुनाव और पार्षद स्तर पर दबदबा नगर परिषद अध्यक्षों के सीधे चुनाव में भी भाजपा का दबदबा साफ नजर आया, जहाँ उसने 105 अध्यक्ष पदों पर जीत दर्ज की। वहीं, महायुति के सहयोगियों ने मिलकर 70 अन्य अध्यक्ष पद जीते। पार्षद स्तर की बात करें तो कुल 6,850 सीटों में से भाजपा ने 2,801 सीटों पर विजय प्राप्त की है। इसके मुकाबले विपक्षी खेमे में कांग्रेस 95, राकांपा 109 और शिवसेना 135 सीटों तक ही सिमट गई। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, महायुति की यह जीत शहरी मतदाताओं के बीच उनके मजबूत होते जनाधार को दर्शाती है।

ट्रिपल इंजन सरकार का उदय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन चुनावों ने महाराष्ट्र में ट्रिपल इंजन सरकार की अवधारणा को धरातल पर उतार दिया है। केंद्र और राज्य में सत्ता होने के बाद अब स्थानीय निकायों में भी महायुति की पकड़ मजबूत हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, स्थानीय चुनावों में जनता अक्सर उसी दल को चुनना पसंद करती है जो राज्य और केंद्र की सत्ता में होता है, ताकि विकास कार्यों में कोई बाधा न आए।

यह परिणाम शरद पवार और उद्धव ठाकरे जैसे अनुभवी नेताओं के लिए एक बड़ी चेतावनी है। विपक्ष की यह विफलता दर्शाती है कि वे अपने पारंपरिक वोट बैंक को बचाने में संघर्ष कर रहे हैं। वहीं, सत्ताधारी दल के लिए यह बड़ी जीत जिम्मेदारी भी बढ़ाती है, क्योंकि जनता की उम्मीदें अब डबल इंजन से बढ़कर ट्रिपल इंजन की रफ्तार पर टिकी हैं।