अधिक अंक वाले बाहर और कम अंक वाले नौकरी पा गये
राष्ट्रीय खबर
सिलिगुड़ी: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने स्टेट बैंक ऑफ सिक्किम की चयन प्रक्रिया में एक ऐसे बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है, जिसने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीएजी की हालिया ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, बैंक में सहायक प्रबंधकों (असिस्टेंट मैनेजर) की भर्ती में मेरिट और योग्यता की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि लिखित परीक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले मेधावी उम्मीदवारों को दरकिनार कर दिया गया, जबकि बेहद कम अंक पाने वाले उम्मीदवारों को बैंक की प्रतिष्ठित नौकरियां दे दी गईं।
यह पूरा मामला 25 मई 2021 को जारी किए गए एक भर्ती विज्ञापन से शुरू हुआ था। बैंक ने सहायक प्रबंधक के 26 पदों के लिए आवेदन मांगे थे, जिसके जवाब में कुल 3,513 उम्मीदवारों ने फॉर्म भरे। इनमें से 2,270 अभ्यर्थी लिखित परीक्षा में शामिल हुए। मार्च 2023 को समाप्त हुए वर्ष के लिए अपनी प्रदर्शन ऑडिट रिपोर्ट में सीएजी ने पाया कि 26 पदों के विरुद्ध केवल 69 उम्मीदवारों को साक्षात्कार (इंटरव्यू) के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया और फरवरी 2022 में अंतिम चयन सूची जारी की गई।
अंकों का चौंकाने वाला खेल ऑडिट के दौरान जो आंकड़े सामने आए, वे किसी को भी हैरान कर सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, समान आरक्षण श्रेणियों के भीतर भी अंकों का भारी अंतर देखा गया। जहाँ एक ओर 128 अंक प्राप्त करने वाले उगेन तेंजिंग भूटिया जैसे योग्य उम्मीदवार का चयन नहीं हुआ, वहीं दूसरी ओर महज 26 अंक पाने वाले मनु गौतम को सहायक प्रबंधक के पद पर नियुक्त कर लिया गया।
इसी तरह, संध्या प्रधान ने 106 अंक, श्रेया गौतम ने 100 अंक और सूरज बास्नेत ने 98 अंक हासिल किए थे, लेकिन इन्हें साक्षात्कार के लिए बुलाया ही नहीं गया या अंतिम सूची से बाहर कर दिया गया। इसके विपरीत, 74, 35 और यहाँ तक कि 28 अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों का नाम फाइनल सिलेक्शन लिस्ट में शामिल था।
रिकॉर्ड्स में हेराफेरी और प्रक्रियात्मक खामियां सीएजी ने केवल अंकों की विसंगति ही नहीं, बल्कि प्रक्रियात्मक भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा किया है। बैंक प्रशासन यह स्पष्ट करने में विफल रहा कि शॉर्टलिस्टिंग का आधार क्या था। ऑडिट में पाया गया कि बैंक के पास मूल्यांकन शीट, कट-ऑफ अंक की सूची, इंटरव्यू पैनल का विवरण और उपस्थिति रजिस्टर जैसे अनिवार्य रिकॉर्ड उपलब्ध ही नहीं हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि एक चयनित उम्मीदवार की उत्तर पुस्तिका पर न तो स्वयं उस उम्मीदवार के हस्ताक्षर थे और न ही परीक्षा पर्यवेक्षक (इनविजिलेटर) के।
इसके अलावा, बैंक ने सेक्शन-वार क्वालिफाइंग मार्क्स तय नहीं किए थे और इंटरव्यू के लिए बुलाए जाने वाले उम्मीदवारों के निर्धारित अनुपात का भी पालन नहीं किया। आरक्षण रोस्टर को लागू करने में भी भारी अनियमितताएं पाई गईं। सीएजी की यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि स्टेट बैंक ऑफ सिक्किम में भर्ती की पूरी प्रक्रिया पक्षपात और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई, जिससे राज्य के हजारों युवाओं का भरोसा टूट गया है।