फर्जी नंबरों के उपयोग का खेल जांच में अंततः पकड़ा गया
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अलग अलग राज्यों में फर्जीवाड़ा
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विभाग ने सही तरीके से जांच नहीं की
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सीधे बैंक खाता में भुगतान में भी गड़बड़ी
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने केंद्र सरकार की प्रमुख कौशल प्रशिक्षण पहल, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के कार्यान्वयन में गंभीर अनियमितताओं की पहचान की है। गुरुवार को लोकसभा में पेश की गई ऑडिट रिपोर्ट में बताया गया है कि 2015 से 2022 के बीच योजना के तीन चरणों के दौरान बैंक खातों के रूप में 11111111111 जैसे फर्जी नंबरों का उपयोग किया गया, कई लाभार्थियों के लिए एक ही फोटो का इस्तेमाल किया गया और लाखों उम्मीदवारों का भुगतान लंबित पाया गया।
कैग की यह रिपोर्ट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पीएमकेवीवाई बेरोजगारी से निपटने के लिए सरकार का एक प्रमुख हथियार रही है। आंकड़ों के अनुसार, मई 2025 में 15-29 वर्ष के आयु वर्ग में बेरोजगारी दर 15 प्रतिशत थी। इस योजना को जुलाई 2015 में युवाओं को उद्योग-प्रासंगिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। 2015 और 2022 के बीच इसके तीन चरणों का कुल परिव्यय लगभग 14,450 करोड़ रुपये था, जिसमें 1.32 करोड़ उम्मीदवारों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया था।
ऑडिट में पाया गया कि स्किल इंडिया पोर्टल पर दर्ज बैंक खाता नंबरों में भारी खामियां थीं। विश्लेषण से पता चला कि 95.90 लाख प्रतिभागियों में से 90.66 लाख (करीब 94.53 प्रतिशत) के बैंक विवरण वाले कॉलम में शून्य, खाली अथवा गलत सूचना वाले थे। शेष 5.24 लाख उम्मीदवारों के मामले में, 12,122 विशिष्ट बैंक खाते 52,381 प्रतिभागियों के लिए दोहराए गए थे। कई मामलों में खाता नंबर के स्थान पर 123456…, एकल अंक, या यहाँ तक कि नाम और पते दर्ज थे। कैग ने नोट किया कि यह डेटा प्रतिभागियों की पहचान के बारे में पर्याप्त आश्वासन नहीं देता है।
मंत्रालय ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि बाद में आधार-लिंक्ड खातों में सीधे भुगतान की सुविधा के कारण बैंक विवरण अनिवार्य नहीं रह गया था। हालांकि, कैग ने पाया कि डीबीटी भुगतान भी केवल 25.58 प्रतिशत प्रमाणित उम्मीदवारों के लिए संसाधित किए गए थे और उनमें से केवल 18.44 प्रतिशत ही सफल रहे। रिपोर्ट के अनुसार, 34 लाख से अधिक प्रमाणित उम्मीदवारों को योजना के चरण पूरे होने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया है। इसके अलावा, कई प्रशिक्षण केंद्र बंद पाए गए, जबकि पोर्टल पर वहां कक्षाएं चलने का दावा किया जा रहा था।