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प्रियंका गांधी की मुस्कान ने सभी का ध्यान खींचा

संसद सत्र के बाद चाय पर मिले सदन के भीतर के विरोधी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः संसद का हालिया शीतकालीन सत्र, जो अपनी शुरुआत से ही तीखी नोक-झोंक, भारी हंगामे और सत्तापक्ष-विपक्ष के बीच कड़वाहट के लिए खबरों में रहा, शुक्रवार को एक बेहद अप्रत्याशित और सकारात्मक मोड़ पर समाप्त हुआ। इस बदलाव का केंद्र बनीं कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा, जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ चाय पर हुई एक सहज और अनौपचारिक बातचीत के जरिए सदन के भारी तनाव को काफी हद तक कम कर दिया।

यह सुखद नजारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कक्ष में आयोजित पारंपरिक पोस्ट-सेशन जलपान के दौरान दिखा। आमतौर पर सत्र की समाप्ति पर होने वाली यह मुलाकात महज एक औपचारिकता होती है, लेकिन इस बार दृश्य अलग था। विपक्षी नेता राहुल गांधी के पार्टी कार्य से जर्मनी में होने के कारण प्रियंका गांधी ने मोर्चा संभाला। जहाँ सदन के भीतर दोनों पक्षों में तलवारें खिंची रहती हैं, वहीं वहाँ प्रियंका और प्रधानमंत्री को हल्की-फुल्की बातचीत और हंसी-मजाक करते देखा गया। इस टी-डिप्लोमेसी की तस्वीरें राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गईं।

संसद में प्रियंका की शैली उनके भाई राहुल गांधी से काफी अलग नजर आई। जहाँ राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह के सामने वोट चोरी जैसे आरोपों के साथ बेहद आक्रामक भाषण दिया, वहीं प्रियंका ने वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान अपनी बात बड़ी शालीनता और सलीके से रखी।

उन्होंने भाजपा द्वारा नेहरू-गांधी परिवार पर किए जाने वाले निरंतर हमलों का करारा जवाब देते हुए कहा, आपको नेहरू जी, इंदिरा जी और राजीव जी की गलतियों या वंशवादी राजनीति पर चर्चा करनी है, तो जरूर कीजिए। इसे 24 घंटे नहीं, बल्कि 40 घंटे तक चलाइए और एक ही बार में सब खत्म कर दीजिए। लेकिन उसके बाद, हमें बेरोजगारी, पेपर लीक और जनता के असल मुद्दों पर बात करनी होगी।

उनकी इस टिप्पणी और चेहरे पर हमेशा रहने वाली एक निरस्त्र कर देने वाली मुस्कान ने सत्तापक्ष के कड़े तेवरों को भी कुछ हद तक नरम कर दिया। सत्र के दौरान प्रियंका की कार्यशैली में विनम्रता और स्पष्टता का संगम दिखा। गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान, उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से बेहद विनम्रतापूर्वक अपने निर्वाचन क्षेत्र की समस्याओं पर चर्चा के लिए समय माँगा।

उन्होंने सदन में कहा, सर, मैं जून से आपसे मिलने का समय मांग रही हूँ। इस पर गडकरी ने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया, आज प्रश्नकाल के बाद ही आ जाइए, मेरे दरवाजे हमेशा खुले हैं। बाद में दोनों की मुलाकात की तस्वीरों ने यह संदेश दिया कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद स्वस्थ संवाद संभव है। कुल मिलाकर, प्रियंका गांधी ने अपने पहले पूर्ण सत्र में यह दिखा दिया कि वे न केवल तीखे राजनीतिक प्रहार करने में सक्षम हैं, बल्कि अपनी सहजता से सदन के गतिरोध को तोड़ने का हुनर भी रखती हैं।