छत्तीसगढ़ के कांकेर में शव दफनाने को लेकर विवाद
-
सरपंच के पिता के निधन से विवाद
-
निजी जमीन पर दफनाया गया था
-
ईसाई बन जाने की सूचना पर हिंसा
राष्ट्रीय खबर
रायपुरः छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के अंतागढ़ ब्लॉक स्थित आमाबेड़ा क्षेत्र में गुरुवार को एक शव दफनाने को लेकर उपजा विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। रायपुर से लगभग 150 किमी दूर स्थित बड़े तेवड़ा ग्राम पंचायत में भीड़ ने दो चर्चों में आग लगा दी, एक घर में तोड़फोड़ की और दफनाए गए शव को खोदकर बाहर निकाल दिया। इस हिंसा में एडिशनल एसपी सहित लगभग 20 पुलिसकर्मी और कई ग्रामीण घायल हो गए हैं।
तनाव तब शुरू हुआ जब ग्राम पंचायत के सरपंच राजमन सलाम के पिता चमरा राम (70 वर्ष) का निधन हो गया। परिजनों ने शव को अपनी निजी जमीन पर दफना दिया। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच का परिवार ईसाई धर्म अपना चुका है और उन्होंने शव को गुपचुप तरीके से, आदिवासी रीति-रिवाजों के खिलाफ दफनाया। ग्रामीणों के विरोध और शिकायत के बाद कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने शव को बाहर निकालने का आदेश जारी किया।
बुधवार से ही स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई थी, जो गुरुवार को हिंसक रूप ले ली। ग्रामीणों और पुलिस के बीच जमकर पत्थरबाजी हुई, जिसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (अंतागढ़) आशीष बंछोर सहित कई जवान घायल हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। प्रशासन की मौजूदगी में शव को खोदकर बाहर निकाला गया और गांव से बाहर ले जाया गया, क्योंकि स्थानीय लोग गांव की सीमा में दफनाने का विरोध कर रहे थे।
अंतागढ़ के अतिरिक्त कलेक्टर अंजोर सिंह पैकरा ने बताया कि सरपंच ने कथित तौर पर ईसाई धर्म अपना लिया था, जबकि उनके पिता हिंदू धर्म के अनुयायी थे। अंतिम संस्कार ईसाई रीति-रिवाजों से किए जाने के कारण ग्रामीण आक्रोशित हो गए। दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के अध्यक्ष अरुण पन्नालाल ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि सरपंच ने धर्मांतरण नहीं किया है और शव को आदिवासी परंपराओं के अनुसार ही दफनाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रामक सूचनाओं के कारण अल्पसंख्यकों के घरों और चर्चों को निशाना बनाया गया। फिलहाल क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।