मोदी को मोदी बनाने वाला शख्स अचानक पर्दे से गायब
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: राजनीतिक गलियारों में उन्हें नरेंद्र मोदी का द्वारपाल कहा जाता है। कुछ उन्हें मोदी का अदृश्य साया बताते हैं, जो हमेशा साथ रहकर भी कभी दिखाई नहीं देता। चर्चा तो यहाँ तक है कि नरेंद्र मोदी को आज का मोदी बनाने और उनकी वैश्विक छवि गढ़ने के पीछे सबसे बड़ा हाथ उन्हीं का है। हम बात कर रहे हैं हिरेन जोशी की, जो गुजरात के मुख्यमंत्री काल से ही मोदी के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार रहे हैं। लेकिन अब दिल्ली की राजनीति में यह चर्चा तेज है कि क्या प्रधानमंत्री ने अपने इस सबसे पुराने वफादार के पर कतर दिए हैं?
हिरेन जोशी पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) में ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) के पद पर तैनात हैं। सालों तक उनके बारे में कोई पुख्ता जानकारी सार्वजनिक नहीं थी। कोई उन्हें मीडिया सलाहकार कहता था, तो कोई आईटी का जानकार। उनकी पहली तस्वीर भी साल 2023 में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान सामने आई, जहाँ वे विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बगल में बैठे दिखे। जानकारों का मानना है कि जोशी मोदी सरकार के असली क्राइसिस मैनेजर रहे हैं। चाहे 2016 में मोदी की डिग्री को लेकर हुआ विवाद हो या सोशल मीडिया पर नैरेटिव सेट करना, जोशी ही पर्दे के पीछे के मास्टरमाइंड माने जाते हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने भी एक बार कहा था कि पीएमओ में मोदी की टीम का नेतृत्व जोशी ही करते हैं, जिनका काम सोशल मीडिया की निगरानी और प्रधानमंत्री को अपडेट रखना है।
हालिया राजनीतिक सुगबुगाहट बताती है कि पीएमओ में जोशी का प्रभाव कम हुआ है। इसके पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं। पहला, ऑपरेशन सिंदूर के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मोदी की छवि का वैसा प्रचार नहीं हो सका जैसी उम्मीद थी। ऊपर से अमेरिकी राष्ट्रपति के उस दावे का भी प्रभावी ढंग से मुकाबला नहीं किया गया, जिसमें उन्होंने भारत-पाक युद्धविराम में अपनी मध्यस्थता की बात कही थी। इससे मोदी की विश्वगुरु वाली छवि को धक्का लगा। दूसरा कारण ऑनलाइन सट्टेबाजी कांड में परोक्ष रूप से उनका नाम जुड़ना है, जिसे लेकर कांग्रेस ने संसद में भी हंगामा किया।
सूत्रों का कहना है कि मोदी ने जोशी को पूरी तरह से इसलिए नहीं हटाया क्योंकि इससे विपक्ष के आरोपों पर मुहर लग जाती। हालांकि, अब वे मोदी के सबसे करीबी नहीं रहे। उनकी जगह अब एक अन्य ओएसडी प्रतीक दोषी ले रहे हैं। प्रतीक दोषी को लेकर भी चर्चाएं गर्म हैं, जो वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के दामाद हैं। यह बदलाव इशारा करता है कि पीएमओ के भीतर अब शक्ति का नया संतुलन बन रहा है।