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जी राम जी को लेकर एनडीए के भीतर घमासान

महात्मा गांधी को हटाकर राम राम जी के नाम पर बिल

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः केंद्र की मोदी सरकार ने 100 दिनों की रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में आमूल-चूल परिवर्तन करने की तैयारी कर ली है। प्रस्तावित नए विधेयक के तहत न केवल इस योजना की शर्तों में बदलाव किया जाएगा, बल्कि इसका नाम बदलकर विकसित भारत गारंटी फॉर रोजागर एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी संक्षेप में जी राम जी) करने का प्रस्ताव है।

जैसे ही इस नए नाम और बिल के मसौदे की जानकारी सामने आई, विपक्षी दलों ने इस पर कड़ा विरोध जताना शुरू कर दिया। हालांकि, सरकार के लिए चिंता की बात यह है कि इस मुद्दे पर उसके अपने प्रमुख सहयोगी दल, जनता दल यूनाइटेड और तेलुगु देशम पार्टी भी नाराज नजर आ रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि एनडीए के इन सहयोगियों की आपत्ति योजना के नाम में राम शब्द जुड़ने को लेकर नहीं है, बल्कि बिल में शामिल वित्तीय शर्तों को लेकर है। प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, अब से 125 दिनों के काम के कुल खर्च का 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकारों को वहन करना होगा। अभी तक मनरेगा का बड़ा हिस्सा केंद्र सरकार द्वारा दिया जाता था।

जेडीयू के एक सांसद ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, बिहार पहले से ही आर्थिक रूप से पिछड़ा राज्य है। हम केंद्र से विशेष वित्तीय पैकेज की मांग कर रहे थे, लेकिन इसके बजाय हमारे ऊपर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाला जा रहा है। वहीं, टीडीपी के एक सांसद ने भी सुर मिलाते हुए कहा कि वे बिल के पूरी तरह खिलाफ नहीं हैं, लेकिन राज्यों की वर्तमान वित्तीय स्थिति को देखते हुए यह बोझ उठाना संभव नहीं होगा। बीजेपी अब अपने सहयोगियों के इस मौन विद्रोह और असंतोष के कारण दबाव में दिखाई दे रही है, क्योंकि इन दलों के समर्थन के बिना बिल पास कराना मुश्किल हो सकता है।