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उत्तराखंड में रोपवे विकास की नई उड़ान: केदारनाथ, हेमकुंड और कैंची धाम तक कनेक्टिविटी की तैयारी, जानें सरकार का मास्टरप्लान

उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में पर्यटन और तीर्थाटन को नई गति देने के उद्देश्य से कुल 50 रोपवे परियोजनाओं का प्रस्ताव तैयार किया है. इनमें से 6 प्रमुख परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर चयनित किया गया है. इन महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में सोनप्रयाग से केदारनाथ और गोविंद घाट से हेमकुंड साहिब रोपवे शामिल हैं, जिनका कार्य आवंटन कर दिया गया है और जल्द ही जमीनी स्तर पर काम तेज होने की संभावना है.

इसके अलावा काठगोदाम से हनुमानगढ़ी मंदिर, नैनीताल तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना इस समय अनुमोदन के चरण में है. रोपवे विकास के लिए गठित संचालन समिति की एक अहम बैठक मुख्य सचिव आनंद वर्धन की अध्यक्षता में आयोजित की गई, जिसमें प्रदेश में रोपवे निर्माण को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए.

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य में बनने वाले सभी रोपवे प्रोजेक्ट्स को संचालन समिति से अनिवार्य रूप से स्वीकृति लेनी होगी. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अलग-अलग एजेंसियों द्वारा तैयार की जा रही परियोजनाओं में किसी भी प्रकार की डुप्लीकेसी न हो. उन्होंने कहा कि रोपवे के बड़े प्रोजेक्ट्स के पूरा होने के बाद अगले 5 से 10 वर्षों में स्थानीय स्तर पर विकसित होने वाले नए पर्यटन स्थलों और मार्गों के विस्तार को ध्यान में रखते हुए अभी से एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जाना चाहिए.

प्रदेश में प्रस्तावित 50 रोपवे परियोजनाओं में कनकचौरी से कार्तिक स्वामी तक रोपवे की डीपीआर तैयार की जा रही है. वहीं रैथल-बारसू से बरनाला (उत्तरकाशी) और जोशीमठ-औली-गौरसों रोपवे के लिए डीपीआर तैयार करने की निविदा प्रक्रिया भी प्रगति पर है.

‘6 प्राथमिक परियोजनाओं पर विशेष फोकस किया जाए’

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि फिलहाल चयनित 6 प्राथमिक परियोजनाओं पर विशेष फोकस किया जाए. सोनप्रयाग-केदारनाथ और गोविंद घाट-हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाओं की प्रत्येक स्टेज की स्पष्ट टाइमलाइन तय करने के भी निर्देश दिए गए हैं. इसके साथ ही वन एवं वन्यजीव से संबंधित स्वीकृतियों की प्रक्रिया को तेज करने पर भी जोर दिया गया.

पुलों के मजबूतीकरण के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश

रोपवे निर्माण के लिए भारी मशीनरी को साइट तक पहुंचाने के लिए सड़कों के टर्निंग रेडियस बढ़ाने और पुलों के मजबूतीकरण के आवश्यक कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए हैं. इसके अलावा काठगोदाम से हनुमानगढ़ी मंदिर रोपवे प्रोजेक्ट में कैंची धाम को शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं. बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए कैंची धाम के लिए रोपवे की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा.