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म्यांमार के अस्पताल पर हुआ हवाई हमला

जुंटा शासन के अत्याचार में अब तक कोई कमी नहीं

बैंकॉकः म्यांमार में चल रहे आंतरिक संघर्ष ने एक और भयावह मोड़ ले लिया है, जहाँ रात के अंधेरे में एक अस्पताल पर किए गए हवाई हमले में कम से कम 34 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 80 से अधिक घायल हुए हैं। यह अमानवीय हमला देश की सैन्य जुंटा और लोकतंत्र समर्थक लड़ाकों तथा सशस्त्र जातीय समूहों के बीच चल रहे हिंसक संघर्ष को और गहरा करता है।

यह हमला अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन है, क्योंकि युद्ध क्षेत्रों में अस्पतालों को विशेष रूप से संरक्षित किया जाता है। हमले में निशाना बनाए गए अस्पताल के नागरिक सुविधा होने के बावजूद, जुंटा ने अक्सर यह दावा किया है कि वह केवल उन ठिकानों को निशाना बना रहा है जहाँ विद्रोही समूह (पीपल्स डिफेंस फोर्स) छिपते हैं या चिकित्सा सहायता लेते हैं। हालांकि, ज़मीन पर मौजूद रिपोर्ट्स और चश्मदीदों के बयानों से पता चलता है कि मारे गए और घायल हुए लोगों में बड़ी संख्या में निर्दोष नागरिक, मरीज़ और स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं।

यह घटना म्यांमार में आम नागरिकों के खिलाफ सैन्य जुंटा द्वारा किए जा रहे अत्याचारों की एक और दर्दनाक कड़ी है, जो फरवरी 2021 के तख्तापलट के बाद से लगातार जारी है। जुंटा की यह क्रूर रणनीति नागरिकों में डर पैदा करने और प्रतिरोध आंदोलन को कमज़ोर करने पर केंद्रित है।

इस हमले की खबर सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक निंदा हुई है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने तुरंत इस कार्रवाई की निंदा की और मानवीय सहायता की सुरक्षित पहुँच सुनिश्चित करने के लिए तत्काल संघर्ष विराम की मांग की है। ऐसे हवाई हमलों के कारण पहले से ही संकटग्रस्त देश में मानवीय संकट और गहरा गया है।

हज़ारों लोग अपने घरों और गांवों से विस्थापित होकर सुरक्षित स्थानों की तलाश में भटक रहे हैं। इसके अतिरिक्त, हवाई हमले से घायल हुए लोगों को चिकित्सा सहायता पहुंचाने में भारी मुश्किलें आ रही हैं, क्योंकि कई स्वास्थ्य केंद्र या तो नष्ट हो चुके हैं या सुरक्षा चिंताओं के कारण बंद हैं, जिससे मरने वालों की संख्या और बढ़ने की आशंका है।