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7 बेटियों के पिता की मौत, लाड़लियों ने कंधे पर उठाया अंतिम कर्तव्य, रो पड़ा पूरा मोहल्ला

सागर: सागर शहर में जब एक व्यक्ति की अंतिम यात्रा निकल रही थी तो मानों सड़क पर निकलने वाले हर शख्स की नजर अंतिम यात्रा पर पड़ रही थी. शव यात्रा देखकर लोगों की आंखे भी भर आई, वजह थी अंतिम यात्रा में जिस व्यक्ति को ले जाया जा रहा था उसको कंधा कोई और नहीं बल्कि उसकी 7 बेटियां दे रहीं थीं. बेटियों ने अपने पिता की हिंदू रीति रिवाज के साथ अंतिम संस्कार की क्रियाएं की और उन्हें मुखाग्नि भी दी. बेटियों ने बेटे का फर्ज निभाते हुए वह सब कुछ किया जो एक बेटा अपने पिता के लिए अंतिम समय में करता है.

नागपुर में इलाज के दौरान तोड़ा दम
सागर के राजीव नगर में रहने वाले डालचंद वाल्मीकि की कुछ दिन पहले बुखार आने से तबीयत बिगड़ गई थी. जिसके बाद परिजन ने उन्हें शासकीय अस्पताल में भर्ती करा दिया था. डॉक्टरों की जांच के बाद परिवार को यह पता चला कि उन्हें गले में छाले हो गए हैं. यह छाले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. यदि समय पर इलाज नहीं मिला तो कुछ भी हो सकता है. परिवार ने जैसे-तैसे रुपयों का प्रबंध किया और उन्हें इलाज के लिए नागपुर ले गए. इलाज ने दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया. इसके बाद परिजन शव को नागपुर से सागर लेकर पहुंचे और रविवार को अंतिम संस्कार किया गया.

बेटियों ने पिता को बचाने की भरपूर कोशिश की
डालचंद वाल्मीकि की सबसे बड़ी बेटी साधना ने बताया कि, ”पिछले रविवार को उनके पिता को अचानक बुखार आ गया था. जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया और इलाज शुरू कराया गया. जब जांच हुई तो पता चला की गले में छाले हो गए हैं. जिसके बाद बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज से नागपुर रेफर कर दिया गया था. हम लोगों ने घर में जितने रुपए थे और मां के जेवर थे उन सब को गिरवी रख के इलाज कराया. लेकिन पिता को जिंदा वापस घर नहीं ला पाए.”

साधना ने आगे बताते हुए कहा कि, ”हम लोगों के घर में सात बहने हैं जिसमें सबसे छोटी बहन की उम्र 12 साल है. कुल घर में आठ मेंबर हैं. कमाने वाले केवल उनके पिता थे, वह पिछले 24 सालों से नगर निगम में विनियमित तौर पर सफाई कर्मचारी का काम कर रहे थे. उन्हीं की सैलरी से परिवार का भरण पोषण होता था. अब घर में कोई भी कमाने वाला नहीं है. हम लोग कहां जाएंगे क्या करेंगे कुछ समझ नहीं आ रहा है. प्रशासन अगर मदद कर दे तो बड़ा उपकार होगा.”

परिजन ने की नौकरी की मांग
मृतक के भतीजे शंकर का कहना है कि, ”बीमारी से उसके चाचा का निधन हो गया है. उनकी 7 बेटियां हैं कोई बेटा नहीं है. अब परिवार के साथ घर चलाने का संकट आ गया है. हम प्रशासन से मदद की मांग करते हैं. अगर पिता की जगह बेटी को नौकरी पर रख ले तो परिवार को बड़ा सहारा मिल सकता है.”