गाजा का संघर्ष विराम बहुत नाजुक मोड़ पर
रियाधः कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने हाल ही में एक बयान जारी किया है जिसमें उन्होंने इजरायल और हमास के बीच चल रहे गाजा संघर्ष विराम की स्थिति को नाजुक मोड़ पर बताया है। कतर इस संघर्ष विराम को सुनिश्चित करने और बंधकों की रिहाई के लिए एक प्रमुख मध्यस्थ रहा है। प्रधानमंत्री का यह बयान दोनों पक्षों के बीच चल रहे तनाव और समझौते के किसी भी समय टूटने की आशंका को दर्शाता है।
संघर्ष विराम समझौते में गाजा में मानवीय सहायता की पहुँच को बढ़ाना, कुछ इजरायली बंधकों की रिहाई और उसके बदले में इजरायल की जेलों में बंद फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई शामिल थी। कतर के अधिकारी इस बात से चिंतित हैं कि छोटी-मोटी घटनाओं, जैसे कि बंधकों की रिहाई में देरी या किसी भी पक्ष द्वारा मामूली उल्लंघन, के कारण पूरा समझौता विफल हो सकता है।
उनका कहना है कि स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सभी पक्षों को समझौते की शर्तों का सख्ती से पालन करना चाहिए। इस बयान का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस ओर खींचना भी है कि स्थायी समाधान के लिए दबाव बनाना जारी रखा जाए। मध्यस्थ के रूप में कतर की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, और उसका यह आकलन दर्शाता है कि आगे की राह अभी भी अनिश्चितताओं से भरी हुई है। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक भी इस बात से सहमत हैं कि संघर्ष विराम तभी टिक सकता है जब प्रमुख मुद्दे, जैसे कि लंबी अवधि की सुरक्षा व्यवस्था और गाजा का भविष्य, हल किए जाएँ।