ईरान का जल संकट गंभीर हालत में पहुंचा है
तेहरानः अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों ने ईरान में चल रहे गंभीर जल संकट की भयावहता को स्पष्ट रूप से उजागर किया है, जिससे देश की पारिस्थितिकी और सामाजिक स्थिरता पर खतरा मंडरा रहा है। इन तस्वीरों में ईरान के प्रमुख जलाशयों, झीलों और नदी के किनारों पर पानी के स्तर में तेजी से कमी दिखाई दे रही है। कई क्षेत्रों में, जो कभी पानी से लबालब रहते थे, अब सूखे और बंजर दिखाई दे रहे हैं। यह स्थिति दशकों से चल रहे अवैज्ञानिक जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों और बारिश की कमी का परिणाम है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह जल संकट इतना गंभीर हो चुका है कि राजधानी बदलने की नौबत आ सकती है। तेहरान जैसे बड़े शहरों को, जो पहले से ही उच्च जनसंख्या घनत्व और भूजल के अत्यधिक दोहन का सामना कर रहे हैं, पानी की आपूर्ति बनाए रखने में भारी कठिनाई हो रही है। यदि राजधानी शहर में पानी की आपूर्ति और अधिक संकटग्रस्त होती है, तो सरकार को लाखों लोगों को किसी कम सूखे वाले क्षेत्र में स्थानांतरित करने या प्रशासनिक केंद्र को बदलने पर विचार करना पड़ सकता है। यह एक अत्यंत महंगा और जटिल प्रक्रिया होगी, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ेगा।
इस संकट ने पूरे देश में पानी के लिए संघर्ष और कृषि पर निर्भर आबादी के लिए जीविका के नुकसान को जन्म दिया है। किसानों को मजबूरन अपनी जमीनें छोड़नी पड़ रही हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर पलायन बढ़ रहा है। सरकार इस समस्या से निपटने के लिए समुद्री जल को मीठा करने और बेहतर सिंचाई तकनीकें अपनाने की योजना बना रही है, लेकिन समस्या की विशालता को देखते हुए, तत्काल राहत मिलना मुश्किल लग रहा है। ईरान का यह जल संकट दुनिया के अन्य देशों के लिए भी एक कड़ी चेतावनी है कि पानी की कमी किस प्रकार एक बड़े राष्ट्रीय सुरक्षा और अस्तित्व का मुद्दा बन सकती है।