Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Lokesh Meena Death Case: अपने ही गोत्र में इश्क करने पर 7 लाख जुर्माना, अब जिंदा जलने से युवक की संद... Bihar Politics: सरकारी कैलेंडर पर मंत्री ने छपवाई परिवार की फोटो, शुरू हुआ विवाद, RJD का हमला Bareilly Crime News: अश्लील हरकत का विरोध करने पर सब्जी वाले के घर पथराव, ईंट लगने से बुजुर्ग महिला ... Agra News: आगरा में बच्ची की हत्या पर भड़की भीड़, पथराव और गाड़ियों में तोड़फोड़ Bangladesh Bus Accident: नदी में गिरी यात्रियों से भरी बस, 23 लोगों की दर्दनाक मौत, कई लापता Bastar Naxal News: 96% नक्सल मुक्त हुआ बस्तर, जानें 400 सिक्योरिटी कैंप को लेकर क्या है सरकार का प्ल... खाड़ी में भयंकर युद्ध! ईरान के हमले में 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत, कुवैत में मची सबसे ज्यादा तबाही दुश्मनों की अब खैर नहीं! ड्रोन से लैस होंगे भारतीय सेना के टैंक, 'शौर्य स्क्वाड्रन' बना हाईटेक ताकत Swami Avimukteshwaranand News: यौन उत्पीड़न मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को हाई कोर्ट से अग्रि... क्वांटम प्रकाश में 48 आयामी दुनिया की खोज

SIR का खौफ या ममता की रणनीति? बांग्लादेश सीमा पर उमड़े घुसपैठियों का क्या है सच, क्यों बढ़ गई है सीमा पर हलचल?

पश्चिम बंगाल के बांग्लादेश से सटे उत्तर 24 परगना के हकीमपुर बॉर्डर ऑउटपोस्ट पर लगातार बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत में प्रवेश किए लोगों की भीड़ उमड़ रही है. बच्चों, महिलाओं के साथ हकीमपुर पहुंच रहे लोग वापस बांग्लादेश जाने के लिए बीएसएफ जवानों से फरियाद कर रहे हैं. इनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. यह दावा किया जा रहा है कि SIR के भय से भारत में लंबे समय से रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठिए अब वापस बांग्लादेश लौट रहे हैं.ये खबर और तस्वीरें वायरल होने के बाद पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस खुद हकीमपुर बॉर्डर आउटपोस्ट पर पहुंचें और वहां की स्थिति की समीक्षा की. राज्यपाल ने अवैध बांग्लादेशियों के कथित ‘रिवर्स माइग्रेशन’ की रिपोर्ट्स की समीक्षा की.

हालांकि बुधवार को जिस दिन राज्यपाल बॉर्डर आउटपोस्ट पर पहुंचें. उस दिन वहां से बांग्लादेश लौटने वालों का जत्था लापता था. वहां न तो कोई कतार थी और न ही बांग्लादेश लौटने वाले लोगों की भीड़ थी, जो वापस बांग्लादेश लौटना चाहते थे.

हकीमपुर आउटपोस्ट पर बांग्लादेशियों की भीड़

राज्यपाल ने बुधवार को हकीमपुर ऑउटपोस्ट का दौरा किया था, लेकिन उनके वापस लौटने के बाद फिर से हकीमपुर आउटपोस्ट पर अवैध बांग्लादेशियों की भीड़ उमड़ पड़ी है और वे वापस बांग्लादेश लौटना चाहते हैं.

गौरतलब है कि बांग्लादेश लौटने वाले ज्यादातर लोग मुस्लिम समुदाय से हैं और इनमें से अधिकतर लोगों की कहना है कि वे लोग अवैध रूप से भारत में प्रवेश किए थे, लेकिन अब एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है और मतदाता सूची के शुद्धिकरण का काम चल रहा है. ऐसे में 2002 या 2003 की एसआईआर की लिस्ट में उनके या उनके परिवार का नाम नहीं है. ऐसे में वे आशंकित हैं और उन्हें भय है कि उन्हें देश से बाहर भेज दिया जाएगा. इस वजह से वे लोग स्वतः ही बांग्लादेश लौटना चाहते हैं.

क्या SIR की खौफ बांग्लादेश लौटने की है वजह?

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक पार्थ मुखोपाध्याय इन दावों को लेकर सवाल खड़ा कर रहे हैं. उनका कहना है कि साल 1971 में बांग्लादेश के स्वतंत्र होने के बाद बड़ी संख्या में बांग्लादेशी शरणार्थी भारत आए. उन्हें भारत ने शरणार्थी की मान्यता दी. असम और पश्चिम बंगाल में उनके लिए उत्बास्तु (शरणार्थी) कॉलोनी बनाए गए. उसके बाद भी लंबे समय से बांग्लादेश से भारत में घुसपैठिए आ रहे हैं और यह सर्वविदित हैं. राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकारें यह स्वीकार कर रही हैं कि भारत में बांग्लादेशी घुसपैठिए बंगाल से होते हुए देश के विभिन्न इलाकों में हैं. इ घुसपैठियों ने न केवल यहां का एपिक कार्ड बना रखा है, बल्कि आधार कार्ड, पैन कार्ड से लेकर कईयों के पास जमीन और जायदाद भी हैं.

उनका कहना है कि जब यह बातें लगभग साफ हो गई हैं कि SIR प्रक्रिया से भले ही उन लोगों को मतदाता सूची में अपना नाम शामिल करने में परेशानी हो, जिनके नाम उनके या उनके माता-पिता, दादा-दादी या नाना-नानी के नहीं हैं, लेकिन उनके बाद पासपोर्ट, डोमिसाइल सर्टिफिकेट जैसे 12 मान्य प्रमाणपत्र हैं, तो वे अपने नाम मतदाता सूची में शामिल करवा सकते हैं. ऐसे में SIR के भय से बांग्लादेशी घुसपैठियों को पलायन की बात की सत्यता पर सवाल उठ रहे हैं.

SIR को लेकर भय पैदा कर ही हैं ममता, भाजपा का आरोप

दूसरी ओर, ममता बनर्जी लगातार SIR का विरोध कर रही हैं और उन्होंने एसआईआर की तुलना एनआरसी से की है और इसे लेकर एक विशेष समुदाय खास कर मुस्लिमों और बांग्लादेश से आकर भारत में बसे बांग्लादेशियों के बीच भय पैदा करना चाह रही हैं. इसके पहले भी 2021 के विधानभा चुनाव के दौरान ममता बनर्जी ने सीएए और एनआरसी को बड़ा मुद्दा बनाया था और इसे लेकर मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण करने में कामयाब रही थी. बंगाल में मुस्लिमों की आबादी करीब 32 फीसदी हैं. इनमें बड़ी संख्या में बांग्ला भाषी मुस्लिम हैं, जिनका बांग्लादेश से नाता रहा है.

ऐसे में बीएलओ की मौत और एसआईआर का खौफ को तृणमूल कांग्रेस सियासी हथियार बना रही है और बिहार चुनाव में भले ही एसआईआर मुद्दा नहीं बन पाया हो, लेकिन ममता बनर्जी इसे सियासी रंग देने में जुटी हुई हैं. हालांकि भाजपा ने लगातार ममता बनर्जी पर आरोप लगा रही हैं कि ममता बनर्जी एसआईआर को लेकर भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रही हैं.

बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी का दावा है कि ममता बनर्जी एसआईआर के नाम पर लोगों में भ्रम पैदा कर रही है और इसे लेकर लोगों में आतंक पैदा कर रही हैं. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी SIR नहीं रोक पाएगी. उन्हें भय है कि उनके अवैध बांग्लदेशी घुसपैठियों के वोटर के नाम कट जाएगा. इसलिए वह मुख्य चुनाव अधिकारी पर व्यक्तिगत हमले कर रही हैं और चुनाव आयोग को गाली दे रही हैं, लेकिन इस चुनाव में राज्य की जनता उन्हें सत्ता से बाहर कर देगी.