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प्रशांत क्षेत्र के द्वीपों के लिए ड्रैगन की नई रणनीति

चीन ने नई सुरक्षा पहल की घोषणा की

बीजिंगः चीन ने प्रशांत द्वीप राष्ट्रों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एक नई क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग पहल की घोषणा की है। यह पहल इन छोटे द्वीप राष्ट्रों को कई प्रकार की सहायता प्रदान करने पर केंद्रित है, जिसमें पुलिस प्रशिक्षण, साइबर सुरक्षा प्रणालियों की स्थापना, और संयुक्त समुद्री गश्त आयोजित करना शामिल है।

यह कदम ऐसे समय में आया है जब चीन इस महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक क्षेत्र में अपना प्रभाव तेजी से बढ़ा रहा है, जिसे पारंपरिक रूप से ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अमेरिका के प्रभाव क्षेत्र के रूप में देखा जाता रहा है।

चीन का दावा है कि यह पहल प्रशांत द्वीप देशों की स्वतंत्रता और संप्रभुता को मजबूत करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगी। हालांकि, इस घोषणा को अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने चिंता की दृष्टि से देखा है। इन पश्चिमी देशों को डर है कि चीन इस सुरक्षा सहयोग का उपयोग इन द्वीप राष्ट्रों के साथ सैन्य समझौते करने के लिए कर सकता है, जैसा कि उसने पहले सोलोमन द्वीप के साथ किया था।

यदि चीन इस क्षेत्र में नौसैनिक या सैन्य ठिकाने स्थापित करने में सफल होता है, तो इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन बदल सकता है और पश्चिमी देशों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका दोनों ने चीन की इस पहल का मुकाबला करने के लिए अपनी आर्थिक और सैन्य सहायता को बढ़ाया है।

इस घोषणा ने प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को तेज कर दिया है, क्योंकि छोटे द्वीपीय राष्ट्रों को अब अपने विकास और सुरक्षा जरूरतों के लिए दो प्रमुख शक्तियों के बीच चयन करना पड़ रहा है। अंतर्राष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में वैश्विक शक्ति संघर्ष का एक प्रमुख केंद्र बना रहेगा।