बार बार युद्ध की धमकी के बीच सरकार ने लिया फैसला
ताइपेः ताइवान ने चीन के बढ़ते डिजिटल प्रभाव, साइबर सुरक्षा खतरों और दुष्प्रचार के खतरे को देखते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। ताइवान ने सरकारी विभागों में चीन में विकसित सभी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम के उपयोग पर औपचारिक रूप से प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला ताइवान की राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा गोपनीयता की रक्षा करने के उद्देश्य से लिया गया है।
ताइवान लंबे समय से चीन की ओर से होने वाले साइबर हमलों और राजनीतिक दुष्प्रचार का निशाना रहा है। चीन की एआई तकनीक पर प्रतिबंध लगाने का यह निर्णय, ताइवान की सरकार द्वारा अपनी डिजिटल संप्रभुता और डेटा सुरक्षा को प्राथमिकता देने का स्पष्ट संकेत है। ताइवान की सरकार का मानना है कि चीन में विकसित एआईसिस्टम्स में सुरक्षा में खामियां हो सकती हैं जिनका उपयोग संवेदनशील सरकारी डेटा तक पहुँचने या ताइवान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के लिए किया जा सकता है।
यह प्रतिबंध सभी सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्रों की इकाइयों और सरकारी धन प्राप्त संस्थानों पर लागू होता है। इसमें चीनी कंपनियों द्वारा बनाए गए एआईचैटबॉट्स, डेटा एनालिटिक्स उपकरण, और अन्य AI-संचालित सॉफ़्टवेयर शामिल हैं। ताइवान के अधिकारी अब इन प्रणालियों को बदलने के लिए घरेलू या अन्य भरोसेमंद अंतर्राष्ट्रीय स्रोतों से एआईसमाधानों की तलाश करेंगे।
यह कदम वैश्विक स्तर पर चीन की प्रौद्योगिकी के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ चिंता को भी दर्शाता है। अमेरिका और कई यूरोपीय देश पहले ही चीनी दूरसंचार उपकरणों और ऐप्स के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा चुके हैं। ताइवान का यह फैसला प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भू-राजनीतिक विभाजन को और गहरा करता है। चीन ने इस प्रतिबंध की आलोचना करते हुए इसे अनावश्यक और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है, जबकि ताइवान अपनी सुरक्षा को लेकर अडिग है। इस निर्णय से भविष्य में ताइवान में स्वदेशी एआईविकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।